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'फ़ैसला, जो जम्मू भी माने और कश्मीर भी'

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शिवराज पाटिल ने कहा है कि मामले का हल निकालने के लिए जल्द फैसला लिया जाएगा
जम्मू के बिगड़ते हालात पर शनिवार को हुई बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि ऐसा फ़ैसला लेना होगा जिसे दोनों पक्ष स्वीकार करें. इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए शनिवार को 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर पहुँची जहाँ मसले के समाधान पर विचार किया गया.

हालांकि नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता फ़ारूख़ अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी की महबूबा मुफ़्ती और कांग्रेस के सैफ़ुद्दीन सोज़ को बातचीत से अलग रखा गया.

अमरनाथ संघर्ष समिति ने इन तीनों को अलग रखने की शर्त पर ही बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी. केंद्रीय गृहमंत्री ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हमने दोनों ओर से रखे गए सुझावों को ग़ौर से सुना है और उन्हें अपने पास दर्ज किया है. अब उनपर बातचीत औऱ सुझाव लेकर जल्द ही कोई फ़ैसला किया जाएगा."

अमरनाथ मंदिर ज़मीन विवाद सुलझाने के लिए दिल्ली से शनिवार को गृह मंत्री शिवराज पाटिल के नेतृत्व में 18 सदस्यों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू पहुँचा था.

बातचीत किस नतीजे पर पहुँची, इसपर सीधे टिप्पणी से बचते हुए शिवराज पाटिल ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि मामले का हल शक्ति से नहीं, समझदारी से निकलेगा.

पर यह संभावित हल क्या हो सकता है, इसपर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी. बस संकेत भर दिया कि ऐसा फ़ैसला लेना होगा जो जम्मू के लोगों को भी मान्य हो और कश्मीर के लोगों को भी.

उधर संघर्ष समिति ने कहा है कि वे अपने विरोध प्रदर्शन के क्रम से पीछे नहीं हटे हैं और यह मंदिर बोर्ड को ज़मीन दिए जाने तक जारी रहेगा.

अमरनाथ का मुद्दा

ये पूरा विवाद तब शुरु हुआ था जब कांग्रेस के नेतृत्व और पीडीपी के सहयोग वाली ग़ुलाम नबी आज़ाद सरकार ने अस्थायी तौर पर सौ एकड़ ज़मीन अमरनाथ यात्रियों की व्यवस्था के लिए अमरनाथ मंदिर बोर्ड को देने का फ़ैसला किया.

इस पर कश्मीर घाटी में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हुए, पीडीपी ने सरकार में फ़ैसले के समय शामिल होने के बावजूद अपना पल्ला झाड़ लिया और सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

हालाँकि सरकार ने ये फ़ैसला वापस ले लिया लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार विधानसभा में समर्थन नहीं जुटा पाई और सत्ता से बाहर हो गई. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सर्वदलीय बैठक में प्रतिनिधिमंडल जम्मू भेजने का फ़ैसल हुआ

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला वापस लेने पर और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी बोर्ड की जगह सरकार के हाथ में आ जाने के कारण जम्मू क्षेत्र में भीषण प्रदर्शन शुरु हो गए, जो अब भी जारी है. अमरनाथ संघर्ष समिति की माँग है कि अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दी जाए और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी फिर बोर्ड ही निभाए.

बंद 14 अगस्त तक

दिल्ली के सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के दौरे से ठीक पहले अमरनाथ संघर्ष समिति ने जम्मू में 14 अगस्त तक बंद को बढ़ाने का ऐलान किया. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक राज्य सरकार की ओर से अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के मामले में सकारात्मक प्रस्ताव नहीं आएगा संघर्ष समिति राज्यपाल के प्रतिनिधियों से बातचीत नहीं करेगी.

राज्यपाल एनएन वोहरा ने इस मसले का समाधान निकालने के लिए एक चार सदस्यीय समिति की घोषणा की थी. उधर सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल भेजने का फ़ैसला प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुई बैठक में हुआ था.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमरनाथ संघर्ष समिति ने इन घोषणाओं से केंद्र और राज्य सरकार दोनों को संदेश दे दिया है कि सिर्फ़ बातचीत की औपचारिकताओं से बात बनने वाली नहीं है.

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