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करियर : 'स्वतंत्र कार्य' है स्वआनंदपरक रोजगार

By Staff
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नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। स्वतंत्र रूप से कार्य करना वस्तुत: स्वरोजगार का सर्वोत्तम रूप है। इसमें पूंजी निवेश भी नहीं करना पड़ता। स्वतंत्र कार्यकर्ता में कतिपय कौशल विकसित होने चाहिए तथा उसे अपने हिसाब से अलग-अलग ग्राहकों को पैसा और समय-दोनों रूपों से संतुष्ट करना चाहिए।

वह स्व-विवेक से निर्णय लेता है कि कोई कार्य किस प्रकार से किया जाना है तथा तय की गई राशि की दृष्टि से ग्राहक को संतुष्ट करना है। ऐसा व्यक्ति दूसरों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि अपने कौशल के बलबूते आगे बढ़ता है।

विश्वसनीयता सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है और जैसे-जैसे विश्वसनीयता बढ़ती है, मार्केट और पैसा-दोनों में ही वृद्धि होती है। अन्य महत्वपूर्ण कारक संपर्क है। फ्रीलांसर को मार्केट में अच्छे संबंध विकसित करने चाहिए। कार्य तथा ग्राहकों के साथ बर्ताव के माध्यम से और मार्केट में स्थापित शोहरत से अधिक संपर्क बनते हैं।

यदि कोई व्यक्ति फ्रीलांसर बनना चाहता है तो उसे स्वतंत्र कार्यजगत की अनिश्चितताओं का सामना करना, समय प्रबंधन तथा अच्छी दरों पर समझौता करना सीखना चाहिए। साथ ही व्यक्ति को समय-समय कौशल अद्यतन करने चाहिए तथा अपने व्यवसाय से संबंधित नवीन घटनाक्रमों से परिचत रहना चाहिए। स्वतंत्र कार्यो में फोटोग्राफी, पत्रकारिता, अध्यापन और लेखन कार्य शामिल हैं। इसके अलावा ऐसे अन्य क्षेत्र भी हो सकते हैं, जहां फ्रीलांसिंग की जा सकती है, बशर्ते व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में प्रवीण हो।

स्वतंत्र कार्य निम्नलिखित क्षेत्र में हो सकते हैं -फोटोग्राफी: चित्र और डिजाइन सहित फोटोग्राफी लोकप्रिय स्वतंत्र विकल्प है। इस प्रकार के सर्जनात्मक व्यवसायों में अभिप्रेरित करनेवाला कारक 'एकाधिक नियोक्ता' का होना है। सफल रिकॉर्ड का प्रमाण, अच्छा पोर्टफोलियो, सही प्रकार के मार्केटिंग कौशल-ये ऐसे अनिवार्य तत्व हैं, जिनसे अच्छा पारिश्रमिक एवं सराहना मिलती है।

पत्रकारिता और लेखन: पत्रकार और लेखक के रूप में यह सर्वोत्तम प्रोफेशन है। इसमें अर्जित योग्यता अपनी इतनी प्रमुख भूमिका नहीं निभाती जितनी संप्रेषण कौशल तथा घिसे-पिटे विचारों को सर्वाधिक रोचक ढंग से लेख या लेखन में प्रस्तुतीकरण निभाता है। लेखों तथा पुस्तकों की संख्या के साथ-साथ प्रतिष्ठा बढ़ती है। यह रचनाएं उत्तम कोटि की हों और सुरुचिपूर्ण हों। पत्रकारिता में रिपोर्टिग सर्वाधिक प्रचलित स्वतंत्र कार्य है।

प्रबंधन परामर्शदाता : आज के युग में प्रबंधन परामर्शदाता आकर्षक प्रोफेशन है। विशेषत: अनुभवी कार्यपालक का लोकप्रिय प्रोफेशन है, जो कार्यो के अनुभव के आधार पर परिपूर्ण अवस्था पर पहुंचते हैं। प्रबंधन परामर्शदाता का कार्य डाटा संचय, समीक्षा और विश्लेषण है। यह उपयुक्त सुझाव देता है तथा प्रस्ताव के कार्यान्वयन में सहायता करता है। व्यक्ति के पास संबंधित क्षेत्र में उच्च स्तर की विशेषज्ञता होनी चाहिए, क्योंकि परामर्शदाता द्वारा दी गई सलाह को गंभीरता से लिया जाता है।

परामर्श सेवा के विभिन्न प्रकार हैं - कार्य परामर्शदाता, कर परामर्शदाता, मानव संसाधन परामर्शदाता, मार्केटिंग परामर्शदाता , सुरक्षा परामर्शदाता, इंजीनियरिंग परामर्शदाता, स्वास्थ्य परामर्शदाता, मनोविज्ञान परामर्शदाता आदि। स्वतंत्र कार्य करते समय अंतर्वैयक्तिक कौशल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि परामर्श सेवा के लिए आने वाले ग्राहक बाध्य होते हैं अथवा समस्या के प्रति नकारात्मक रवैया रखते हैं। इस प्रकार से परामर्श सेवा में मात्र सलाह नहीं दी जाती बल्कि ग्राहक की सकारात्मक मनोवृत्ति बनाए रखी जाती है, ताकि दी गई सलाह लागू हो सके।

व्यवसाय सेवाएं : ऐसे कार्य के लिए संपर्क या संतुष्ट ग्राहकों से मिलनेवाले सुझाव के माध्यम से ग्राहकों की संख्या में वृद्धि होती है। इस प्रकार के स्वतंत्र कार्य में लेखा प्रणाली, जनसंपर्क, मार्केट शोध, निजी तहकीकात और प्रत्यक्ष बिक्री आती है।

होम सर्विस : आंतरिक सज्जा, डिजाइन, पाक कला और केटरिंग, ब्यूटी क्लीनिक, संविदा आधार पर स्वच्छता कार्य, सुरक्षा/सतर्कता अधिष्ठापना, क्रैच, उद्यान डिजाइनिंग, घरेलू कार्यो के लिए स्टाफ देना भी है, जिसमें बिल जमा कराना आदि जैसे कार्य शामिल हैं। स्वतंत्र कार्य में जोखिम उठाते समय प्रमुखत: इस बात को ध्यान में रखा जाए कि उपयुक्त दामों पर सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान की जाएं।

आपको यह सुनिश्चित करना है कि प्रचार कार्य इस प्रकार से किया जाए कि ग्राहकों को दिखाई दे। इस प्रकार के व्यवसाय में मुंह से की गई तारीफ या प्रचार का अधिक महत्व है तथा ग्राहक की संतुष्टि के आधार पर व्यवसाय मिलता है। इस क्षेत्र में अनुभव या संबद्ध क्षेत्र में प्रशिक्षण निश्चित रूप से आदर्श योग्यता है, लेकिन प्रबंधन कौशल की भी केंद्रीय भूमिका है।

यह याद रखना जरूरी है कि स्वतंत्र कार्य में आपके पास विशेषज्ञता होनी चाहिए तथा ग्राहकों की संतुष्टि में विश्वास रखना चाहिए। यदि ये दोनों गुण विद्यमान हैं तो इस क्षेत्र में सफलता की कोई सीमा नहीं है।

(करियर संबंधी और अधिक जानकारी के लिए देखिए ग्रंथ अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित ए. गांगुली और एस. भूषण की पुस्तक "अपना कैरियर स्वयं चुनें"।)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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