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वीज़ा बढ़वाने भारत लौटीं तस्लीमा

By Staff
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तस्लीमा कोलकाता को अपना दूसरा घर कहती हैं
विवादास्पद बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन चार महीने स्वीडन में रहने के बाद भारत लौटी हैं. अधिकारियों का कहना है कि वे अपना वीज़ा बढ़वाने आई हैं.

तस्लीमा के भारतीय वीज़ा की अवधि 12 अगस्त को ख़त्म हो रही है.

स्वीडन की नागरिकता ले चुकीं तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को जैसे ही दिल्ली पहुँचीं उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है.

उन्होंने इसी साल मार्च में भारत छोड़कर स्वीडन जाने का फ़ैसला किया था.

उनका कहना था कि मुस्लिम कट्टरपंथियों की धमकियों के चलते भारत सरकार ने उन्हें सुरक्षा के नाम पर जहाँ रखा था वह 'प्रताड़ना-गृह' जैसा था.

उनका कहना था कि वहाँ उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उनका इलाज ठीक तरह से नहीं हो पा रहा था.

तस्लीमा नसरीन 1993 में पहली बार अपनी पुस्तक 'लज्जा' से चर्चा में आईं थीं.

इस किताब को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन पर ईश निंदा का आरोप लगाया था और उनके ख़िलाफ़ मौत का फ़तवा जारी कर दिया था.

तब से वे बांग्लादेश से बाहर रह रही हैं.

वापसी

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को स्वीडन से भारत पहुँचीं और यहाँ पहुँचते ही उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है.

अपना वीज़ा की अवधि बढ़वाने के लिए मैं दिल्ली में हूँ लेकिन मेरा दिल कोलकाता में है

अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर भारतीय ख़ुफ़िया विभाग के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, "हम जानते हैं कि तस्लीमा अपने वीज़ा की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करेंगी और संभावना है कि वो भारतीय नागरिकता के लिए भी आवेदन करें."

तस्लीमा ने ईमेल के ज़रिए कुछ पत्रकारों से कहा है कि वे कोलकाता भी आना चाहती हैं ताकि अपना सामान, किताबें और अपनी पालतू बिल्लियों को साथ ले जा सकें.

ईमेल पर तस्लीमा ने कहा, "अपना वीज़ा की अवधि बढ़वाने के लिए मैं दिल्ली में हूँ लेकिन मेरा दिल कोलकाता में है."

लेकिन इस समय पश्चिम बंगाल सरकार उन्हें वहाँ वापस नहीं लौटने देना चाहती.

बंगाल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी से कहा, "हमें परिस्थितियों का आकलन करना होगा क्योंकि उनकी वापसी से फिर हिंसा भड़क सकती है."

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा है कि क्या तस्लीमा नसरीन को कुछ दिनों के लिए ही सही, वहाँ जाने की अनुमति दी जा सकती है.

विवाद

डॉक्टर से लेखिका बनीं तसलीमा नसरीन को बांग्लादेश की अग्रणी नारीवादी लेखिकाओं में गिना जाता है.

46 वर्षीय तस्लीमा 1993 में अपनी पहली और सबसे विवादास्पद पुस्तक 'लज्जा' के कारण सुर्खियों में आईं थीं.

हैदराबाद के एक कार्यक्रम में कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया था

इस्लामी कट्टरवादियों ने तस्लीमा पर ईश निंदा का आरोप लगाकर उनके ख़िलाफ़ मौत का फ़तवा जारी कर दिया था.

मौत के फ़तवे से बचने के लिए तसलीमा को अपना देश छोड़ना पड़ा था और वे काफ़ी अर्से तक स्वीडन में रहीं.

इसके बाद 1999 में प्रकाशित उनकी किताब 'माई गर्लहुड' पर भी बांग्लादेश में प्रतिबंध लगा दिया गया.

उनके नारीवादी लेखों को लेकर भी बांग्लादेश में ख़ासा बवाल रहा है.

पिछले साल अगस्त में हैदराबाद में एक कार्यक्रम में उन पर हमला हुआ और फिर कोलकाता में उनको निकाले जाने को लेकर प्रदर्शन होने लगे.

इसके बाद तस्लीमा नसरीन को जयपुर ले जाया गया फिर दिल्ली में लाकर अज्ञात स्थान पर रखा गया.

आरोप लगाए गए थे कि तस्लीमा नसरीन को सरकार ने नज़रबंद कर रखा है.

हालांकि सरकार ने इससे इनकार किया था और कहा कि भारत उन्हें शरण देना जारी रखेगा लेकिन उन्हें भारत की भावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए.

फ़रवरी में ही सरकार ने उनके वीज़ा की अवधि छह महीने के लिए बढ़ाई थी.

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