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समुद्री तूफ़ानों के नामकरण का सिलसिला

By ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
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टैक्सस में जुलाई 2008 में आए समुद्री तूफ़ान को डॉली नाम दिया गया
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आने वाले समुद्री तूफ़ानों को ख़ास नाम दिए जाते हैं, मसलन कैटरीना, नरगिस, डॉली, डीन वग़ैरा. इनके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. जानने के लिए क्लिक करें...

समुद्री तूफ़ानों को नाम इसलिए दिया जाता है जिससे उनकी अलग से पहचान हो सके. क्योंकि कई बार एक ही हिस्से में कई तूफ़ान बन रहे होते हैं. लोगों को तूफ़ान की पूर्वसूचना देने के समय भी ये नाम काम आते हैं. ये नाम एक सूची में से लिए जाते हैं जो अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग होती हैं और कुछ साल पहले तैयार कर ली जाती हैं. ये सूचियां या तो विश्व मौसम संगठन की समितियां तैयार करती हैं या फिर इन्हें राष्ट्रीय मौसम कार्यालय बनाते हैं. इस प्रथा की शुरूआत उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में ऑस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञानी क्लेमेंट लिंडली रॉग ने की थी. उन्होंने उन राजनेताओं के नाम पर तूफ़ानों के नाम रखे जिन्हें वो नापसंद करते थे. जैसे-जैसे मौसम विज्ञान में प्रगति हुई और बहुत से तूफ़ानों की जानकारी मिलने लगी तो इन्हें नाम देना सुविधाजनक हो गया.

जद्दाह से रफ़त शाह जानना चाहते हैं कि जीवाश्म ईंधन और जैव ईंधन क्या हैं और इनमें क्या अंतर है.

जीवाश्म ईंधन उसे कहते हैं, जो मृत पेड़-पौधों और जानवरों के अवशेषों से तैयार हुआ. करोड़ों सालों पहले पृथ्वी पर बहुत उथल-पुथल हुई जिसमें वनस्पति संपदा पृथ्वी की सतह में जाकर जमा हो गई. करोड़ों सालों तक इनके जीवाश्म अवशेष गर्मी और दबाव झेलते रहे. जिसकी वजह से इन जैव पदार्थों में रासायनिक परिवर्तन हुए और ये कोयले, तेल और गैस में परिवर्तित हो गए. लेकिन जीवाश्म ईंधन के प्रयोग से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है जो पृथ्वी के तापमान को बढ़ाती हैं. जैव ईंधन उसे कहते हैं जो पृथ्वी पर विद्यमान वनस्पति को एक रासायनिक प्रक्रिया से गुज़ार कर तैयार किया जाता है. जैसे गन्ने के रस को अल्कोहल में बदल कर उसे पैट्रोल में मिलाया जाता है. या मक्का के दानों में खमीर उठाकर उससे ईंधन तैयार किया जाता है. इसके अलावा जथरोपा, सोयाबीन, चुकंदर आदि से भी जैव ईंधन तैयार किया जाता है.

बूमरैंग क्या चीज़ है. पूछते हैं बडाला मुंबई से राजेंद्र शेलर.

बूमरैंग लकड़ी का एक साधारण सा उपकरण है जो बहुत तरह से प्रयोग किया जाता है. इसका संबंध मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों से है हालाँकि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी यह इस्तेमाल होता आया है. यूँ तो बूमरैंग कई आकार के होते हैं लेकिन इनमें सबसे प्रचलित है कोणीय आकार. इनका प्रयोग शिकार करने, धार्मिक अनुष्ठानों और मनोरंजन के लिए किया जाता है. इसे इस तरीक़े से फेंका जाता है जिससे यह गोलाई लिए रास्ते से होता हुआ फेंकने वाले के पास लौट आए. जब इसे फेंकते हैं तो यह एक विचित्र सी आवाज़ करता जाता है और फेंकने वाले के पास लौट आता है. जब इसका प्रयोग शिकार करने के लिए किया जाता है तो बूमरैंग वार करके नहीं लौटता.

लॉन टैनिस की गेंद का वज़न कितना होता है और ये किस चीज़ की बनी होती है. नरपतगंज अररिया बिहार से चंदन कुमार.

यूनाइटेड स्टेट्स टेनिस ऐसोसिएशन और इंटरनेशनल टेनिस फ़ेडरेशन ने टेनिस की गेंद के लिए कुछ मानदंड तय कर रखे हैं उसके अनुसार आधुनिक टैनिस गेंद चमकीले पीले या सफ़ेद रंग की होती है. उसका व्यास ढाई इंच से अधिक लेकिन 2.62 इंच से कम होना चाहिए. उसका वज़न दो औंस से अधिक लेकिन 2.06 औंस से कम होना चाहिए. लेकिन सबसे बड़ी बात होती है कि इसकी उछाल कैसी है. इसकी परीक्षा के लिए गेंद को 100 इंच ऊपर से कंक्रीट के फ़र्श पर फेंका जाता है और अगर ये 53 से लेकर 58 इंच तक उछलती है तो ठीक है. टेनिस की गेंद रबर के एक यौगिक से बनाई जाती है और इसमें हवा भरी होती है.

किसी देश में राष्ट्रीय झंडा उल्टा फहराने से उसका क्या मतलब होता है. कोसिहान भोजपुर बिहार से अमरेश कुमार.

राष्ट्रीय ध्वज फहराने का एक तरीक़ा होता है जिसका सभी देश पालन करते हैं. उसे एक रस्सी के सहारे एक खंभे पर चढा़या जाता है. जब कभी देश के किसी बड़े नेता की मृत्यु हो जाती है तो दुःख प्रकट करने के लिए झंडे को पहले पूरा चढ़ाकर फिर नीचे उतारा जाता है. झंडे को उल्टा फहराना संकट या विपत्ति का परिचायक है.

मोतीनगर बंगलौर कर्णाटक से विनीता वोहरा ने पूछा है कि अमरीकी सेना में जीआईजो क्या होते हैं.

जीआईजो, असल में सैनिक पोशाक वाले गुड्डे हैं, जिन्हें खिलौने बनाने वाली कंपनी हैस्ब्रो ने तैयार किया था. शुरू में अमरीकी सेना की चारों शाखाओं के प्रतिनिधि तैयार किए गए, ऐक्शन सोल्जर, ऐक्शन सेलर, ऐक्शन पायलट और ऐक्शन मरीन. जीआईजो, गवर्नमेंट इशू जो का संक्षिप्त रूप है. सन 1963 में जब बार्बी गुड़ियां बहुत लोकप्रिय हुईं तो खिलौने बनाने वाले स्टैन वैस्टन ने सोचा कि सेना की थीम लेकर लड़कों के लिए गुड्डे बनाए जाएं. यह विचार हैस्ब्रो के डॉन लैविन को पसंद आया और गुड्डे तैयार हुए. ये इतने लोकप्रिय हुए कि इनकी कॉमिक पत्रिकाएं छपने लगीं, वीडियो गेम तैयार हुए और टेलीविज़न सीरीज़ बनी.

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