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करियर: समुद्री अभियांत्रिकी रोमांचक रोजगार

By Staff
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नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। आज समुद्र क्षेत्र से जुड़ा उद्योग प्रौद्योगिकी से सुसज्जित है, जिससे वह दिनोंदिन अधिक सक्षम होता जा रहा है। वस्तुत: आज महासागर में विश्व स्तर पर दस हजार जहाजी बेड़े चल रहे हैं। परिणामस्वरूप, समुद्री अभियांत्रिकी की ओर अधिकाधिक लोग आकर्षित हो रहे हैं।

संभवत: इंजीनियरिंग की यह नवीन शाखा-समुद्री इंजीनियरिंग अनेक पीढ़ियों, वषों के बाद उभरकर सामने आई है। इस शाखा पर दृष्टिपात करने पर पता चलता है कि इस क्षेत्र में मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक, रेफ्रिजरेशन तथा वातानुकूलन इंजीनियरिंग क्षेत्र के अनेक कार्य शामिल हैं। इस क्षेत्र में जितने आयाम दिखाई देते हैं, उससे कहीं अधिक आयाम इस क्षेत्र में विद्यमान हैं।

डेक पर मशीनरी संबंधी कार्य करने के अलावा मेरीन इंजीनियर को आपात स्थिति में समुद्र में घिरे होने पर यदा-कदा आग बुझाने तथा जान बचाने के कौशल का भी प्रदर्शन करना होता है। इन्हें डिजाइन के संबंध में अनुसंधान, शिक्षण और प्रशिक्षण, परामर्श जैसे कार्य भी करने पड़ते हैं। निस्संदेह, इनका मुख्य कार्य इंजन, बॉयलट, रेफ्रिजरेटिंग तथा स्वच्छता संबंधी उपकरणों, डेक मशीनरी और जहाजों के वाष्प कनेक्शन का रख-रखाव करना है। इन्हें लगातार कार्य करना पड़ता है। इस क्षेत्र में असीम धर्य की जरूरत है, लेकिन स्वचालित यांत्रिक कार्य-प्रणाली के कारण यह कार्य सुगम हो चुका है।

पिछले दशक में काफी प्रौद्योगिकीय उन्नति हुई है, जिसके कारण जहाज की मशीनरी अधिक चुनौतीपूर्ण और जटिल बन गई है। इससे अब समुद्री अभियांत्रिकी अर्थात मेरीन इंजीनियरिंग अधिक रोमांचक तथा परितोषप्रद है। भारतीय वाणिज्यिक नौ सेना में कामकाजी स्थितियां अच्छी हैं। इसमें उत्कृष्ट वेतन पैकेज मिलते हैं। इससे इंजीनियरिंग के क्षेत्र से जुड़े प्रार्थियों में यह क्षेत्र विशेष लोकप्रिय होता जा रहा है।

अनेक गैरसरकारी संस्थानों में समुद्री इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाता है। नौ परिवहन महानिदेशक, मुंबई ऐसे समस्त संस्थानों को अनुमोदित करता है, जो मेरीन इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम चलाते हैं, हालांकि अधिकांशत: छात्र ही समुद्री इंजीनियरिंग विषय चुनते हैं। फिर भी पिछले वर्षो में इस दिशा में परिवर्तन नजर आया है। अब इस पाठ्यक्रम में छात्राओं की भी संख्या बढ़ रही है। समुद्री विज्ञान/समुद्री इंजीनियरिंग मर्चेट नेवी (डेक या इंजन विभाग) में शामिल होने के लिए अनिवार्य योग्यता है।

समुद्री अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एमईआरआई) चार वर्ष का पाठ्यक्रम चलाता है, जबकि ट्रेनिंग शिप 'चाणक्य', मुंबई द्वारा समुद्र विज्ञान में बीएस-सी के समकक्ष तीन वर्ष का डिग्री पाठ्यक्रम चलाया जाता है। यह संस्थान मुंबई विश्वविद्यालय से जुड़ा है। समुद्री विज्ञान तथा मेरीन इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए न्यूनतम पात्रता भौतिकी, रसायनशास्त्र, गणित के साथ बारहवीं परीक्षा है।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) के माध्यम से दोनों पाठ्यक्रम के लिए चयन किया जाता है। आईआईटी द्वारा उक्त परीक्षा ली जाती है। मास्टर्स और मेट्स की परीक्षा के संबंध में भारत में लागू विनियमों के अंतर्गत सभी नौ चालन अधिकारियों के लिए दक्षता प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है। महानिदेशक, शिपिंग (डीजीएस), मुंबई के माध्यम से भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा दक्षता परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।

जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्य आरंभ करनेवाले समुद्री इंजीनियर को भी ऐसी ही दक्षता-परीक्षा देनी पड़ती है। डीजीएस उक्त परीक्षा आयोजित करता है तथा जूनियर इंजीनियर को पांचवें, तीसरे व फिर तीसरे इंजीनियर के रैंक पर पदोन्नत किया जाता है। अंतत: उसकी पदोन्नति मुख्य इंजीनियर के रैंक पर की जाती है। पदोन्नति के अंतर्गत पारिश्रमिक में वृद्धि भी शामिल है। यहां चीफ इंजीनियर को लगभग डेढ़ लाख रुपए प्रति माह या अधिक पारिश्रमिक मिलता है।

समुद्री इंजीनियर अनेक देशों और शहरों की सैर करता है। विश्व का कोई भी कोना उससे अछूता नहीं रहता। वह नए-नए लोगों से मिलता है और ऐसे अवसरों का उन्हें लाभ भी मिलता है। इस पर अच्छी-खासी मिलनेवाली मोटी रकम सोने पर सुहागे का काम करती है। शुरू-शुरू में भारतीय पोत में व्यक्ति पच्चीस से तीस हजार रुपए तक कमा सकता है, जबकि किसी विदेशी पोत में वह प्रारंभ में लगभग दो से तीन हजार डालर तक कमा सकता है। यह नौकरी वास्तव में आकर्षक है। पारिश्रमिक के अलावा व्यक्ति को अच्छे-खासे भत्ते आदि भी मिलते हैं।

इस क्षेत्र का एक दूसरा पहलू भी है। समुद्री इंजीनियर एक बार में छह मास तक यात्रा करता है, जिससे उसके कार्य में नीरसता आ जाती है, लेकिन छह मास से अधिक अवधि तक जहाज में रहने का लाभ भी है। इससे व्यक्ति को अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) का दर्जा मिल जाता है, जिसका लाभ यह है कि उसे अपने पारिश्रमिक पर कर नहीं देना पड़ता है। निश्चित रूप से अन्य नौ सैनिक अधिकारियों के समान समुद्री इंजीनियर को प्रतिवर्ष छह मास का सवेतन अवकाश भी मिलता है। यह व्यवसाय दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय हो रहा है। प्रतिवर्ष पैंतीस से चालीस प्रतिशत इंजीनियरिंग छात्र इस विशेष क्षेत्र को चुनते हैं।

(करियर संबंधी और अधिक जानकारी के लिए देखिए ग्रंथ अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित ए. गांगुली और एस. भूषण की पुस्तक "अपना कैरियर स्वयं चुनें"।)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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