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बेवफा पति की तलाश के लिए आरटीआई का सहारा!

By Staff
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नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) ने एक महिला को अपनी बिखरी हुई जिंदगी को पटरी पर लाने का मौका दे लिया है। लालफीताशाही की जकड़न ढीली करने में कारगर साबित हो रहे इस कानून की बदौलत इस भुक्तभोगी महिला को अपने बेवफा पति का पता लगाने में कामयाबी मिल गई है।

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) ने एक महिला को अपनी बिखरी हुई जिंदगी को पटरी पर लाने का मौका दे लिया है। लालफीताशाही की जकड़न ढीली करने में कारगर साबित हो रहे इस कानून की बदौलत इस भुक्तभोगी महिला को अपने बेवफा पति का पता लगाने में कामयाबी मिल गई है।

पिछले कई वषरें से यह महिला पति की बेवफाई की मार झेलती रही है। पति उसकी जिंदगी से वषरें से ओझल था, पर अब महिला ने आरटीआई की बदौलत उसका पता लगा लिया है।

35 वर्षीया महिला एस़ एम. देवसेना को उसका पति 1995 में छोड़कर चला गया। पति ओएनजीसी का कर्मचारी है। आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले की रहने वाली देवसेना ने जब ओएनजीसी से अपने पति के बारे में सूचना मांगी तो कंपनी ने निजी सूचनाओं की गोपनीयता की दुहाई देकर उसे यह बताने से इनकार कर दिया कि उसका पति क़े एल़ एन प्रसाद कहां है।

ऐसे में महिला ने केंद्रीय सूचना आयोग से अपील की और केंद्रीय सूचना आयुक्त एम़ एम. अंसारी ने इस अर्जी पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान महिला ने यह सबूत पेश किया कि उन दोनों की शादी 13 वर्ष पहले हुई थी।

अपने पक्ष में फैसला आने के बाद महिला ने आईएएनएस संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा, "हम दोनों की शादी फरवरी 1995 में हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद मेरा पति मुझे छोड़कर चला गया क्योंकि उसे कोई और पसंद थी। अदालत के फैसले के बावजूद हम दोनों एक नहीं हो पाए, क्योंकि मेरे पति का कोई अता पता नहीं था। अब मुझे जानकारी दी गई है कि वह अहमदाबाद में रह रहा है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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