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बीजिंग ओलंपिक : 29वें ओलंपिक की रंगारंग शुरुआत (राउंडअप)

By Staff
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बीजिंग, 8 अगस्त (आईएएनएस)। चीन की राजधानी बीजिंग में चिड़ियां के घोसले की तर्ज पर इस्पात से बनाए गए राष्ट्रीय स्टेडियम में शुक्रवार को लाखों लोगों की मौजूदगी में एक भव्य व रंगारंग कार्यक्रम के साथ 29 वें ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई। एथेंस ओलंपिक के रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भारतीय दल की अगुवाई की।

बीजिंग, 8 अगस्त (आईएएनएस)। चीन की राजधानी बीजिंग में चिड़ियां के घोसले की तर्ज पर इस्पात से बनाए गए राष्ट्रीय स्टेडियम में शुक्रवार को लाखों लोगों की मौजूदगी में एक भव्य व रंगारंग कार्यक्रम के साथ 29 वें ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई। एथेंस ओलंपिक के रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भारतीय दल की अगुवाई की।

उद्घाटन समारोह के अवसर पर चीन ने सुरक्षा की जबरदस्त व्यवस्था की थी। सुरक्षा व्यवस्था इतनी पुख्ता थी कि साढ़े तीन घंटे तक चले कार्यक्रम के दौरान वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन को पूरी तरह ठप कर दिया गया था।

वर्ष 2001 की 13 जुलाई को ओलंपिक खेलों के आयोजन की मेजबानी मिलने के बाद से ही इसकी तैयारियों में जुटे चीन ने विश्व के सबसे बड़े इस आयोजन का शुभारंभ करके इस मौके को आज ऐतिहासिक बना दिया।

इस अवसर पर यहां रंगारंग कार्यक्रम पेश किए गए। इस कार्यक्रम का लुत्फ उठाने पहुंचे लाखों दर्शक मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सके।

चीनी राष्ट्रपति हू जिन्ताओ के लिए ओलंपिक खेलों का आयोजन बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि तिब्बती विरोध के बावजूद इसकी शानदार शुरुआत हुई।

लगभग साढ़े तीन घंटे चले इस रंगारंग कार्यक्रम के साक्षी बनने के लिए लगभग 80 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष मौजूद थे। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश, फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी, इजराइल के शिमोन पेरेज, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी भी शामिल थीं।

आज उद्घाटन समारोह में रंगारंग कार्यक्रमों के दौरान जमकर आतिशबाजी हुई और कुल 2008 युवाओं ने 2008 फाउ (चीन का पारंपरिक वाद्य यंत्र) की धुनों से स्टेडियम को गुंजायमान कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम में एक बड़ा स्क्रीन लगाया गया था जिस पर ओलंपिक के पांचों चक्र मौजूद थे।

'ए हाइम्न आफ द मदरलैंड' गाने के साथ ही स्टेडियम में चीन का राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया जिसे देखकर वहां मौजूद लगभग एक लाख दर्शक खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।

दर्शकों से भरे खचाखच स्टेडियम की अतिविशिष्ट दीर्धा में चीनी राष्ट्रपति हू जिन्ताओ और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जैक्स रॉग भी मौजूद थे। दोनों ने दर्शकों का अभिवादन किया।

सुरक्षा का आलम यह था कि मीडिया को पहले ही सूचना दे दी गई थी कि उद्घाटन समारोह के दौरान वायरलेस सेवा पूरी तरह ठप रहेगी। हालांकि ब्राडबैंड सेवा जारी थी, लेकिन उसकी रफ्तार बिल्कुल धीमी थी।

नेशनल ओलंपिक स्टेडियम के प्रवेश द्वार और निकास द्वार पर सुरक्षा इतनी सुरक्षा थी कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। इसके अलावा स्वयंसेवक हर तरफ नजर रखे हुए थे। स्वयंसेवक लोगों के सहजता से आने-जाने में मदद कर रहे थे।

सुरक्षा में खामी को कोई गुंजाइश नहीं थी क्योंकि सुरक्षाकर्मियों को हरसंभव कड़ाई बरतने की हिदायत दी गई थी। हालांकि उन्हें बेवजह विनम्रता नहीं खोने की भी सलाह दी गई थी।

स्टेडियम के बाहर और अंदर जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद उद्घाटन समारोह का आनंद लेने पहुंचे लगभग 91 हजार लोगों ने बिना किसी परेशानी के साथ एक शानदार शाम का लुत्फ उठाया। निमंत्रण-पत्र और टिकट के माध्यम से आने वाले लोगों ने साढ़े तीन घंटे तक एक न भूलने वाले अनुभव को महसूस किया।

चीन में शुक्रवार को राष्ट्रीय अवकाश था। इसके बावजूद यातायात व्यवस्था को बहुत सलीके से नियंत्रित किया जा रहा था।

बस मार्गो को सावधानीपूर्वक तय किया गया, जबकि 80 राष्ट्राध्यक्षों को लाने व ले जाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले रास्ते पर यातायात नियंत्रित करने के लिए खास व्यवस्था थी। पत्रकारों और आम जनता के लिए यातायात इतनी व्यवस्थित थी कि किसी को तनिक भी परेशानी नहीं हुई।

इससे पहले, दुनियाभर में 1,37,000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली 2008 ओलंपिक मशाल दौड़ के अंतिम चरण का आयोजन किया गया। बीजिंग ओलंपिक के उद्घाटन समारोह के साथ शुक्रवार को इस दौड़ का समापन हो गया।

अंतिम चरण की दौड़ बीजिंग के पेकिंग मान म्यूजियम और दक्षिण-पश्चिम उपनगरीय इलाके झाउकोदियन के बीच 7.9 किलोमीटर दूरी में आयोजित की गई। झाउकोदियन में वर्ष 1926 में दो लाख वर्ष पुरानी मानव खोपड़ी मिली थी।

दुनिया भर के अपने सफर के दौरान ओलंपिक मशाल ने 137000 किलोमीटर की दूरी तय की। हालांकि इस दौरान उसका ज्यादातर समय हवाई यात्राओं में बीता। कुल मिलाकर उसने अपनी विश्व यात्रा का मात्र चार प्रतिशत यानी 4300 किलोमीटर का सफर जमीन पर तय किया।

अपने सफर के दौरान ओलंपिक मशाल को दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। हालांकि यह विरोध सीधे तौर पर ओलंपिक मशाल के खिलाफ नहीं था, लेकिन चीन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इसे कई बार नुकसान पहुंचने की कोशिश की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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