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कर्नाटक के पारंपरिक शिल्पकार हुए पर्यावरण के प्रति जागरूक

By Staff
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बेंगलुरू 7 अगस्त(आईएएनएस)। कर्नाटक की शिल्पकार बिरादरी पर्यावरण के प्रति जागरूक हो गई है और उसने ऐसे कई उत्पादों का व्यावसायिक इस्तेमाल बंद कर दिया है, जो पर्यावरण की सेहत के लिए ठीक नहीं हैं।

बेंगलुरू 7 अगस्त(आईएएनएस)। कर्नाटक की शिल्पकार बिरादरी पर्यावरण के प्रति जागरूक हो गई है और उसने ऐसे कई उत्पादों का व्यावसायिक इस्तेमाल बंद कर दिया है, जो पर्यावरण की सेहत के लिए ठीक नहीं हैं।

शिल्पकारों ने पर्यावरण संरक्षण को अपने पेशे का मूल मंत्र मान लिया है और इसलिए उन्होंने सजावटी वस्तुओं के निर्माण में हाथी दांत और सींग जैसे पशु उत्पादों का इस्तेमाल बंद कर दिया है। यही नहीं, इस बिरादरी ने जिंक ऑक्साइड और रोगन का भी इस्तेमाल बंद कर दिया है, जबकि अब तक ये रसायन इस उद्योग के लिए जरूरी उत्पाद माने जाते रहे हैं। उन्होंने रासायनिक रंगों का इस्तेमाल भी बंद कर दिया है और उनकी जगह वे प्राकृतिक रंगों व लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं।

कर्नाटक राज्य हस्तकला विकास निगम लिमिटेड के सहायक प्रबंधक राजगोपाल रेड्डी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "कर्नाटक के शिल्पकारों द्वारा तैयार हस्तशिल्प उत्पाद पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। हम चाहते हैं कि यह बिरादरी पर्यावरण और प्रकृति को कम से कम नुकसान पहुंचाए। हमें खुशी है कि शिल्पकार पर्यावरण के प्रति अपने फर्ज को लेकर संजीदा हो गए हैं। हम उन्हें पर्यावरण संरक्षण के कई नायाब गुर भी सिखा रहे हैं।"

हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी के दौरान इस संवाददाता से एक अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने शिल्पकारों द्वारा पर्यावरण की रक्षा के लिए की गई पहल पर प्रकाश डाला। 4 अगस्त से 17 अगस्त तक चलने वाली इस प्रदर्शनी व मेले में विभिन्न राज्यों के उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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