• search

'इस देश को भगवान भी नहीं बचा सकता'

|

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी सरकारी आवास को लेकर कड़ा रुख़ अपनाया था
सरकारी आवासों को खाली करवाने को लेकर सरकार के ढुलमुल रवैये से नाराज़ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस देश को तो भगवान भी नहीं बचा सकता.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट चाहता था कि सरकार क़ानून में संशोधन करे ताकि सरकारी आवासों में अवैध रुप से रह रहे लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सके लेकिन सरकार ने इससे इनकार कर दिया.

इससे पहले भी अदालत ने सरकारी आवासों में अवैध रुप से रहने के मामले में सख़्त रवैया अपनाया था.

बिहार के राज्यपाल बनने के बाद बूटासिंह का दिल्ली का आवास अदालत के आदेश से ही खाली हुआ था.

नाराज़गी

न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल और न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी के पीठ ने सरकार पर कई कड़ी टिप्पणियाँ कीं.

सुप्रीम कोर्ट के इस पीठ ने कहा, "हम इस सरकार से उकता गए हैं. इस सरकार में तो बाबुओं की राय के ख़िलाफ़ जाने का भी दम नहीं है."

इस देश को तो सरकार भी नहीं बचा सकता. भारत में यदि भगवान भी नीचे उतर आए तो इस देश को नहीं बदल सकता. हमारे देश का चरित्र ही बदल गया है. हम असहाय हो गए हैं

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार न्यायाधीशों ने अपनी टिप्पणी में कहा, "इस देश को तो सरकार भी नहीं बचा सकता. भारत में यदि भगवान भी नीचे उतर आए तो इस देश को नहीं बदल सकता. हमारे देश का चरित्र ही बदल गया है. हम असहाय हो गए हैं."

पीठ का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट में बहुत से लोग जनहित याचिका लगाते हैं क्योंकि वे सरकार के रवैये से हताश होते हैं.

सरकार में बैठे लोगों को आड़े हाथों लेते हुए कोर्ट ने कहा, "जब आप सत्ता में होते हैं तो न्यायिक सक्रियता दिखाई देती है और जब आप सत्ता से बाहर होते हैं तो हमसे समाधान चाहते हैं."

कारण

सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी की वजह सरकार का एक फ़ैसला था.

एडीशनल सॉलीसिटर जनरल अमरेंदर सरन ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि सरकार ने भारतीय दंड विधान की धारा 441 में संशोधन नहीं करना चाहती.

सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि अवैध कब्ज़े से जुडी इस धारा में संशोधन से सरकारी आवास को खाली करवाना आसान हो सकेगा.

सरकार का कहना था कि सरकारी आवासों को खाली करवाने के लिए लोक परिसर क़ानून ही पर्याप्त है.

बिहार के राज्यपाल बन गए बूटा सिंह ने दिल्ली का मकान अदालत की फटकार के बाद खाली किया था

सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि 99, 100 सरकारी आवासों में से सिर्फ़ 300 आवासों में लोग अवैध रुप से रह रहे हैं.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से भी कहा था कि वे भारतीय दंड विधान की धारा 441 में संशोधन करें जिससे कि सरकारी आवासों में रह रहे लोगों के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट जारी हो सके और उन्हें जेल भेजा जा सके.

समाचार एजेंसी के अनुसार हालांकि हरियाणा, नागालैंड, मिज़ोरम, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, मणिपुर, चंडीगढ़, उत्तराखंड, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने क़ानून में संशोधन की रज़ामंदी दिखाई थी लेकिन सिर्फ़ उत्तरप्रदेश और उड़ीसा ने ऐसा किया.

बचे राज्यों ने जवाब ही नहीं दिया और केंद्र सरकार ने साफ़ कह दिया कि वह इस क़ानून में संशोधन नहीं करना चाहती.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more