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रक्षा के लिए तेज शारीरिक विकास की क्षमता से लैस था हाडरेसोर

By Staff
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वाषिंगटन, 6 अगस्त(आईएएनएस)। माना यह जाता है कि करोड़ों वर्ष पहले धरती पर विचरण करने वाली एक खास डायनासोर प्रजाति 'हाडरेसोर' टायरेनोसोर जैसे विशालकाय परभक्षिओं का आसानी से शिकार बन जाती थी, लेकिन एक ताजा शोध से इसकी पुष्टि होती है कि कुदरत ने लंबे व मुलायम बदन वाले हाडरेसोर को इस मुसीबत से बचने के लिए तेज शारीरिक विकास की क्षमता से लैस कर दिया था।

वैज्ञानिकों ने घास व पेड़-पौधे खाने वाले डायनासोर से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने बत्तखनुमा सिर वाली डायनासोर प्रजाति 'हाडरेसोर' और 'हाइपाक्रोसोर' से जुड़े आंकड़ों की तीन परभक्षी डायनासोर प्रजातियों 'टायरेनोसोर', 'अल्बर्टोसोर' और 'टायरेनोसोर रेक्स' से जुड़े आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला।

उनके मुताबिक कुदरत ने आहार के लिए वनस्पतियों पर आश्रित रहने वाली इन डायनोसोर प्रजातियों को न सिर्फ तेज शारीरिक विकास की क्षमता से लैस किया था, बल्कि शारीरिक विशालता के मामले में भी ये परभक्षियों से आगे निकल गई थीं। ऐसे में ये परभक्षी इन प्रजातियों के डायनोसोर के पास फटकने की जुर्रत नहीं कर पाते थे।

शोधकर्ताओंे के मुताबिक हाइपाक्रोसोर को वयस्क बनने में 10 से 12 साल ही लगते थे, जबकि परभक्षी टायरेनोसोर को पूर्ण शारीरिक विकास में 20 से 30 साल लग जाते थे। ओहियो विश्वविद्यालय के कालेज ऑॅफ आस्टियोपैथिक मेडिसिन के शोधकर्ता ड्रियू ली ने अपनी एक सहयोगी लिजा नोएल कूपर के साथ मिलकर यह शोध किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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