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अनपढ़ डकैत रखते थे राइटर !

By Staff
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भोपाल, 5 अगस्त (आईएएनएस)। चंबल से लेकर बुंदेलखंड तक के बीहड़ों में अपनी वारदातों से कई पटकथाओं के नायक बने अधिकांश डकैतों का स्कूलों से दूर दूर तक नाता नहीं रहा है, यही वजह रही है कि वे अपने गिरोह में कुछ साक्षर सदस्य रखते थे जो फिरौती की मांग से लेकर गैंग के मुखिया की प्रेमिका तक के लिए पत्र लिखने और पत्रों को पढ़ने का काम करते थे।

छोटी-छोटी वारदातों को अंजाम देकर दुर्दान्त डकैत बनने तक का सफर तय करने वाले अधिकांश डकैतों ने स्कूलों तक का मुंह नहीं देखा था। पढ़े- लिखे डकैतों में सबसे ऊपर अंबिका प्रसाद पटेल उर्फ ठोकिया का नाम आता है, जो इंटर पास था। गांव में कंपाउंडर का काम करता था और उसे लोग डॉक्टर तक कहने लगे थे।

चंबल के बीहड़ में 'सनकी डकैत' के नाम से पहचाने जाने वाले पहलवान सिंह गुर्जर उर्फ सलीम का महिला प्रेम किसी से छुपा नहीं है। उसने प्रेमिका को पाने के लिए कई हत्याएं तक कीं। सलीम सपना दिल्ली वाली का तो सिर्फ इसलिए दीवाना था क्योंकि वह पढ़ी-लिखी थी। सलीम सपना से फिरौती की मांग के पत्र लिखवाने का काम करवाता था।

चंदन यादव की प्रेमिका रेणु यादव थी। रेणु अपना संदेशा चंदन तक पत्र लिखकर भेजती थी। चंदन अनपढ़ था इसलिए वह रेणु का पत्र लेकर बीहड़ से गांव की ओर भागता था ताकि वह रेणु के पत्र में लिखी बात को जान सके। आगे चलकर उसने रेणु को अपने गिरोह का ही सदस्य बना लिया और उससे बतौर राइटर काम लेने लगा।

बीहड़ में पांच साल तक आतंक के पर्याय के तौर पर पहचान बनाने वाले निर्भय सिंह गुर्जर का तो पढ़ाई से कभी नाता ही नहीं रहा। वह अखबार की खबरें सुनने से लेकर फिरौैती के पत्र लिखने तक के लिए अपने दो विश्वस्त बुद्ध सिंह लाठी और राज किशोर मल्लाह की मदद लिया करता था। बाद में निर्भय ने किसी तरह अपने हस्ताक्षर करना सीख लिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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