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'आश्रम के छात्र ने की दोनों हत्याएँ'

By फ़ैसल मोहम्मद अली
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इससे पहले गुजरात स्थित आश्रम में भी दो बच्चों की मौत हो चुकी है
आसाराम बापू के छिंदवाड़ा स्कूल आश्रम में दो दिनों के भीतर दो बच्चों की मौत के मामले में पुलिस ने उसी आश्रम के एक छात्र को गिरफ़्तार किया है.

गिरफ़्तार किया गया छात्र आश्रम में नौवीं कक्षा में पढ़ता है

पुलिस महानिरीक्षक एमआर कृष्णा ने छिंदवाड़ा में पत्रकारों से कहा, "जुलाई माह में ही स्कूल में दाखिला लेने वाला यह लड़का हॉस्टल में नहीं रहना चाहता था और इस कारण भारी मानसिक दबाव में था. बच्चे भी वहां उसकी कद काठी का मज़ाक उड़ाते थे और इन्हीं नाराजगियों में उसने यह हत्याएं कर दीं."

पुलिस का कहना है कि इस हत्या की गुत्थी मृत पाए गए छात्र वेदांत के बाएँ कंधे पर मिले दांतों के निशान से खुली जिसकी बनावट के बाद फॉरेंसिक टीम इस नतीजे पर पहुँची कि दांत के ऐसे आकार और दांतों के बीच की जगह तेरह से चौदह साल की उम्र के बच्चों के बीच पाई जाती है.

इस आधार पर हुई पूछ-ताछ के बाद जांच दल आरोपी तक पहुँचा.

पुलिस महानिरीक्षक ने दावा किया कि आरोपी और वेदांत के कंधे पर पाये गए दांतों के निशान मैच कर गए हैं और उसने दोनों हत्यायों का ज़ुर्म कबूल कर लिया है.

नृशंस हत्या

उन्होंने कहा कि जब 'हत्यारा' वेदांत का सर पानी में डूबोने की कोशिश कर रहा था तो उसने इसे नाकाम करने की पूरी कोशिश की और इसी कारण आरोपी ने उसके कंधों पर दांत गड़ा दिए.

मध्य प्रदेश के दक्षिणी शहर छिंदवाड़ा स्थित आसाराम बापू आश्रम के छात्रावास में जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में एक दिन के अंतराल पर दो बच्चों - राम कृष्ण यादव और वेदांत को मृत पाया गया था.

वेदांत का सर पानी से भरी बाल्टी में डूबा हुआ था और दरवाजा बाहर से बंद था.

आसाराम बापू के आश्रम में छोटी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों की मौत की यह चौथी घटना थी. इससे पहले अहमदाबाद आश्रम में पढने वाले दो विद्यार्थियों की लाश आश्रम के पास मिली थी.

मध्य प्रदेश शासन ने छिंदवाड़ा में हुई मौतों की जांच एक दंडाधिकारी से करवाने की घोषणा की थी साथ ही इसके लिए एक विशेष पुलिस दल भी गठित किया था.

पुलिस टीम ने अपनी जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर शनिवार शाम यह दावा किया था कि आश्रम में हुईं दोनों मौतें दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या के मामले हैं.

मकसद

रविवार की प्रेस कॉंफ्रेंस में यह भी कहा गया कि हॉस्टल में नहीं रहने के इच्छुक हत्या के आरोपी को अहमदाबाद आश्रम में हुई दो मौतों से यह विचार आया कि अगर यहाँ भी ऐसी मौतें हो जाएँ तो आश्रम बंद हो जायेगा और वह घर वापस जा सकेगा.

कोफ्रेंस में ही इस दावे को लेकर काफ़ी सवाल उठे: जब आश्रम में टी वी नहीं है और न छात्रों को बाहर जाने कि इजाज़त है तो फिर कथित हत्यारे को अहमदाबाद की घटनाओं की जानकारी कैसे मिली?

यह सवाल भी उठा कि जब आश्रम में बड़े बच्चों का हॉस्टल पहली मंजिल पर है और कम उम्र के छात्र नीचे के हिस्से में रहते हैं तो नौंवी कक्षा का एक विद्यार्थी किस तरह बार-बार वहां आता रहा और उसने दो दो हत्याएं कर दीं और वहां मौजूद कर्मचारियों और सेवकों को इसकी भनक तक नहीं मिली?

साथ ही यह भी कि जब आश्रम छोटी कक्षा के छात्रों की निगरानी के लिए हर समय सेवक-सेविकाओं के मौजूद रहने का दावा करता है तो छोटे बच्चों को शाम के समय किस तरह अकेले बाथरूम जाने दिया गया.

पुलिस इन बातों का कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाई. आध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू का क्षेत्र में गहरा राजनीतिक प्रभाव है जिसका फायदा उठाने के लिए इलाके के राजनेता आसाराम बापू के मंचों का इस्तेमाल करते रहे हैं.

इसे देखते हुए इस पूरे मामले में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं की खामोशी छिंदवाड़ा में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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