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श्रीलंका से शरणार्थियों का भारत आना बदस्तूर जारी

By Staff
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कोलंबो, 2 अगस्त (आईएएनएस)। श्रीलंका भले ही तमिल विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष में जीत हासिल कर रहा हो, लेकिन तमिल शरणार्थियों का भारत जाना बदस्तूर जारी है, जिससे लगता है कि जातीय संघर्ष के थमने की कोई संभावना नहीं दिखाई पड़ रही है।

कोलंबो, 2 अगस्त (आईएएनएस)। श्रीलंका भले ही तमिल विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष में जीत हासिल कर रहा हो, लेकिन तमिल शरणार्थियों का भारत जाना बदस्तूर जारी है, जिससे लगता है कि जातीय संघर्ष के थमने की कोई संभावना नहीं दिखाई पड़ रही है।

श्रीलंका के संघर्ष वाले उत्तरी क्षेत्र से खतरनाक समुद्री यात्रा करके इन दिनों जो तमिल तमिलनाडु पहुंच रहे हैं, वे लगभग कंगाली की हालत में हैं।

दशकों से चेन्नई में शरणार्थियों के लिए काम कर रहे श्रीलंकाई तमिल एस.सी. चंद्रहासन ने आईएएनएस को बताया, "इससे पहले जब शरणार्थी यहां आते थे, तो उनके पास जरूरत का कुछ सामान अवश्य होता था। अब वे बिना सामान के कुछ कपड़ों और पैसों के साथ आ जाते हैं।"

चंद्रहासन ने कहा कि वहां की स्थिति बहुत खराब है। उन्होंेने बताया कि अधिकांश शरणार्थी लिबरेशन टाइगर्स आफ तमिल ईलम (लिट्टे) के नियंत्रण वाले श्रीलंका के मन्नार, वावुनिया और किलिनोच्ची जिलों से आ रहे हैं। कुछ शरणार्थी जाफना और लिट्टे के गढ़ मुल्लइतिवु से भी आ रहे हैं।

इस वर्ष जनवरी में केवल 145 तमिल शरणार्थी भारत पहुंचे थे। यह संख्या फरवरी में 159 और मार्च में बढ़कर 233 हो गई। लेकिन संघर्ष में तेजी आने के बाद मई में यह आकंड़ा बढ़कर 556 हो गया। जून में शरणार्थियों की संख्या में गिरावट आई और केवल 228 तमिल भारत पहुंचे। लेकिन जुलाई में पुन: यह संख्या बढ़कर 242 पहुंच गई।

जनवरी 2006 के बाद से अब तक 22,000 तमिल शरणार्थी भारत आ चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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