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सीपीआई(एम) नेता हरकिशन सुरजीत की मौत

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Harkishan surjeet
नोएडा, 1 अगस्तः मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वयोवृद्ध नेता हरकिशन सिंह सुरजीत की आज दुपहर नोएडा स्थित मेट्रो अस्पताल में मृत्यु हो गई।

92 वर्षीय सुरजीत पिछले कुछ समय से बीमार थे उन्हें मई माह में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में कुछ ठीक होने पर जून महीनें में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था।

ह्रदय संबंधी परेशानी होने पर उन्हें एक बार फिर जुलाई में अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों की विशेष देख-रेख में उन्हें वेंटिलेटर में रखा गया था।

हरकिशन की मौत को देश की राजनीति की एक बड़ी क्षति के रुप में देखा जा रहा है।

भारत में गठबंधन राजनीति को नयी दिशा प्रदान करने वाले क्रांतिकारी और व्यावहारिक नेता हरकिशन सिंह सुरजीत को सत्ता से मोह नहीं था लेकिन उन्होंने कई बार 'किंगमेकर' की भूमिका बखूबी निभायी।

23 मार्च 1916 को पंजाब के जालंधर जिले में पैदा हुए सुरजीत का पूरा जीवन मार्क्सवाद के प्रसार में लगा रहा। 1996 और 2004 में केंद्र की गठबंधन सरकार के गठन में उनकी अहम भूमिका रही।

हिंदी भाषी प्रदेशों में पार्टी के प्रभाव के विस्तार में उनकी उललेखनीय भूमिका रही हालांकि केन्द्र में वाम मोर्चा सरकार बनाने की उनकी हसरत अधूरी ही रह गयी। इसके पहले माकपा को सिर्फ तीन प्रदेशों की ही पार्टी माना जाता था।

संप्रग सरकार के गठन में भी कामरेड सुरजीत की अहम भूमिका को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल ही में विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के अपने जवाब में सुरजीत का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि वह पूरे सम्मान के साथ सरदार हरकिशन सिंह सुरजीत द्वारा संप्रग को दिये गये मार्गदर्शन और समर्थन को याद रखेंगे।

सुरजीत को 1992 में माकपा का महासचिव बनाया गया। उनके कार्यकाल के दौरान देश की राजनीतिक स्थिति उथलपुथल भरी रही और इस दौरान विभिन्न संसदीय चुनावों में कोई भी पार्टी बहुमत हासिल करने में नाकाम रही।

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