'विकास को प्रभावित किए बिना मुद्रास्फीति पर लगाम मुश्किल'
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय तथा निजी औद्योगिक संगठनों द्वारा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गठित 'द फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशंस' (एफआईईओ) का कहना है कि तेल की कीमतों में कमी और शेयर बाजारों में बेहतर कारोबार के बावजूद मुद्रास्फीति की समस्या बरकरार रहेगी।
एफआईईओ के अध्यक्ष गणेश गुप्ता ने एक वक्तव्य में कहा, "विश्लेषकों के मुताबिक उत्पादकों द्वारा बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाले जाने के कारण मुद्रास्फीति की दर अभी और बढ़ेगी और यह 15 फीसदी तक पहुंच सकती है। ऐसे में रिजर्व बैंक (आरबीआई) उस पर काबू करने के लिए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और रेपो दर (जिस दर पर वह व्यापारिक बैंकों को कर देता है) बढ़ा सकता है।"
गुप्ता की ये टिप्पणियां उस समय आई हैं जबकि रिजर्व बैंक द्वारा 29 ज़ुलाई को मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा की जानी है।
गुप्ता ने कहा कि कड़ी मौद्रिक नीति के कारण उत्पादन के विकास संबंधी सूचकांकों पर भी असर पड़ेगा। गौरतलब है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 15.5 फीसदी का योगदान देने वाले विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर इस वित्तीय वर्ष की अप्रैल-मई की अवधि के दौरान 5.3 फीसदी दर्ज की गई जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह दर 12.7 फीसदी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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