अमेरिका के साथ सैन्य समझौतों की राह पर भी बढ़ने लगी सरकार
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। वाम दलों के समर्थन वापस लिए जाने के बाद सरकार ने अमेरिका के साथ कुछ सैन्य समझौतों पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इनमें बिना किसी लेन-देने के सैन्य विमानों और पानी के जहाजों को एक-दूसरे के यहां ईंधन भरने की अनुमति देने संबंधी समझौता भी शामिल है।
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। वाम दलों के समर्थन वापस लिए जाने के बाद सरकार ने अमेरिका के साथ कुछ सैन्य समझौतों पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इनमें बिना किसी लेन-देने के सैन्य विमानों और पानी के जहाजों को एक-दूसरे के यहां ईंधन भरने की अनुमति देने संबंधी समझौता भी शामिल है।
दरअसल, वाम दलों द्वारा अमेरिका के साथ सैन्य गठजोड़ का विरोध किए जाने के कारण इन समझौतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। इसमें लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट (एलएसए), कम्युनिकेशन इंट्रोपेरैबिलिटी एंड सेक्युरिटी मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (सीआईएसएमओए) और भारत को अमेरिकी सैन्य उपकरण बेचने संबंधी समझौता शामिल है।
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "एलएसए समझौते के तहत दोनों देशों को एक-दूसरे के लड़ाकू विमानों और जलपोतों को ईंधन और अन्य तरह की सुविधाएं मुहैया करानी होगी।"
इस समझौते के फायदे के बारे में अधिकारी ने बताया कि अगले महीने अमेरिकी वायु सेना के साथ रेड फ्लैग अभ्यास में भारत को करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। लेकिन जब एलएसए समझौता हो जाएगा तो भारत को भौतिक रूप से धन नहीं देना पड़ेंगा, बल्कि इसके बदले में उसे अमेरिकी सुरक्षा बलों को जरूरत पड़ने पर सुविधाएं मुहैया करवानी पड़ेगी।
अमेरिका में भारत के राजदूत रोनेन सेन ने इसी संदर्भ में 24 जुलाई को रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी से मुलाकात की। एलएसए की तरह ही अमेरिका का 65 देशों के साथ समझौता है।
इसी तरह भारतीय और अमेरिकी सेना के बीच जमीन, हवा और समुद्र में युद्धाभ्यास के लिए सीआईएसएमओए समझौते का होना जरूरी है, ताकि दोनों के बीच संवाद में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं हो।
अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ते युद्धाभ्यास को देखते हुए इस समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
जहां तक 'एंड यूजर' समझौते की बात है तो भारत इसके वर्तमान स्वरूप में हस्ताक्षर से इनकार करता रहा है। इसके तहत अमेरिका भारत को सेना के लिए जरूरी उपकरणों को बेच सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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