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सावन में लाखों शिव भक्त पहुंचते हैं वैद्यनाथ धाम

By Staff
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पटना, 18 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड के देवघर वैद्यनाथ धाम स्थित ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा करने के लिए प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं। परंतु सावन माह प्रारंभ होते ही यहां शिव भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच जाती है।

सावन प्रारंभ होते ही सुल्तानगंज (बिहार) की उत्तरवाहिणी गंगा से जल भर कांवरिया 'बोलबम' के उद्घोष के साथ 105 किलोमीटर दूर पैदल देवघर की ओर चल पड़ते हैं। उत्तरवाहिणी गंगा होने के कारण यहां की गंगा का महत्व और बढ़ जाता है। देश के विभिन्न भागों तथा पड़ोसी देश नेपाल व मॉरीशस के शिव भक्त यहां प्रतिवर्ष बड़ी तादाद में पहुंचते हैं।

भक्ति और आस्था के इस मेले में प्रतिवर्ष श्रद्घालुओं की बढ़ती भीड़ इस ज्योतिर्लिंग की मान्यता के पुख्ता प्रमाण हैं। कांवड़िया यात्रा मार्ग पर कांवड़ियों को बड़े-बड़े शिविर लगाकर रहने, सोने खाने-पीने व प्राथमिक चिकित्सा की सुविधाएं मुहैया करायी जाती हैं।

वैद्यनाथ धाम के मुख्य पुजारी दुर्लभ मिश्र ने आईएएनएस को बताया कि वैद्यनाथ धाम का जिक्र शिव पुराण में भी मिलता है। यहां के शिव द्वादष ज्योतिर्लिंग में से एक हैं। उन्होंने कहा कि लंका के राजा रावण को इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना का श्रेय जाता है, इस कारण इसे रावणेश्वर भी कहा जाता है।

मिश्र के अनुसार शिव भगवान ने खुद रावण की तपस्या से खुश होकर यह ज्योतिर्लिंग रावण को दी थी, जिसे वह कैलाश पर्वत से लंका ले जा रहा था। लेकिन रावण को शिवलिंग देने के पूर्व शिव ने एक शर्त रखी कि उक्त शिवलिंग ले जाने के क्रम में जमीन पर न रखा जाए वरना यह लिंग वहीं स्थापित हो जाएगा।

इस वरदान से सभी देवता चिंतित हो गए। तत्काल भगवान वरुण रावण के पेट में प्रवेश कर गये। फलत: रावण को लघुशंका महसूस हुई। वहां खड़े एक ब्राह्मण युवक को शिवलिंग देते हुए उसने कहा कि जब तक वे लघुशंका कर नहीं आते हैं तब तक वे इस शिवलिंग को जमीन पर न रखे। रावण को लघुशंका करने में बहुत देर लगी, इधर, ब्राह्मण युवक बने भगवान विष्णु ने शिवलिंग वहीं रख दिया और शिवलिंग वहीं स्थापित हो गया जो आज देवघर में है।

कलांतर में बैजू नामक युवक की उपासना से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने अपना नाम बैजनाथ रखा जो आगे चलकर वैद्यनाथ हो गया । कहा जाता है कि यहां श्री राम ने भी गंगा से जलभर कर शिव की पूजा की थी।

सावन की तैयारी यहां महीनों पूर्व से शुरू हो जाती है। सुल्तानगंज से लेकर वैद्यनाथ धाम तक मेला लगा रहता है। यहां के दुकानदार भी इस महीने का इंतजार वर्ष भर करते हैं। मंदिर से सटे पेड़ा विक्रेता मुनेश्वर का कहना है कि इसी एक माह के लाभ से छह माह का घर खर्च निकलता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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