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इसराइल ने अवशेषों के बदले क़ैदी छोड़े

By Staff
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हिज़्बुल्ला ने दो इसराइली सैनिकों के अवशेष सौंपे
एहुद गोल्डवासर और एल्दाद रेगेव को वर्ष 2006 में पकड़ा गया था लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी कि उनकी मौत हो गई है.

दो इसराइली सैनिकों को बंधक बनाए जाए के बाद इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच युद्ध छिड़ गया था जो एक महीने तक चला था.

उधर इसराइल ने भी लेबनान के पाँच क़ैदियों को हिज़्बुल्ला के हवाले कर दिया है और साथ ही 200 अन्य लोगों के अवशेष भी सौंपेगा.

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने परीक्षणों के ज़रिए इस बात की पुष्टि की है कि जो अवशेष हिज़्बुल्ला ने सौंपे हैं जो बंधक बनाए गए इसराइली सैनिकों गोल्डवासर और रेगेव के ही हैं.

अदला-बदली

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इसराइल अपने दो मृत सैनिकों के अवशेषों की वापसी को 2006 के लेबनान युद्ध की समाप्ति के प्रतीक के रूप में देखना चाहेगा.

दरअसल हिज़बुल्ला का इन दो सैनिकों को बंधक बनाना ही युद्ध का कारण बना था. माना जाता है कि दोनों सैनिकों को जीवित पकड़ा गया था, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

पहले भी इसराइल ने इस तरह के समझौते किए हैं, लेकिन इस बार इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट के क़ैदियों की अदला-बदली पर राज़ी होने के पीछे दो कारण थे- पहला दोनों सैनिकों के परिवारों का दबाव, और दूसरा वित्तीय घोटाले के आरोपों के चलते ओल्मर्ट की ख़राब होती छवि.

दूसरी ओर अगर हिज़बुल्ला की बात की जाए तो लेबनान की सरकार में उनकी हाल ही में बढ़ी भूमिका के बाद, अब क़ैदियों की इसराइल से वापसी उनके लिए एक जीत के समान है.

हिज़बुल्ला को न सिर्फ़ अपने मृत लड़ाकों के शरीर के अवशेष वापस मिले हैं, बल्कि इसराइल ने पाँच जीवित क़ैदी भी लौटाए हैं.

इनमें से समीर कुन्टार सबसे प्रमुख है, जिन्हें 29 साल पहले कई इसराइलियों की हत्या के आरोप में सज़ा दी गई थी.

इसलिए आम इसराइली क़ैदियों की अदला-बदली के इस समझौते को लेकर ज़्यादा ख़ुश नहीं है. दूसरी ओर लेबनान में इसराइली जेल से हिज़बुल्ला समर्थकों के छूटने पर ख़ुशियाँ मनाई जा रही हैं.

इसराइल सरकार के प्रवक्ता मार्क रेगेव ने समीर कुन्टार की रिहाई पर ख़ुशियाँ मनाए जाने पर अफ़सोस व्यक्त करते हुए कहा है, "समीर कुन्टार बच्चों की जान लेने वाला जघन्य हत्यारा है. उसका नायक के रूप में स्वागत करना बुनियादी मानवीय मर्यादा के ख़िलाफ़ है."

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक विश्लेषक नहीं मानते कि क़ैदियों की अदला-बदली के समझौते से दोनों पक्षों के बीच की शत्रुता में कोई कमी आएगी.

क्योंकि इसराइल का आरोप है कि हिज़बुल्ला न सिर्फ़ लेबनान की राजनीति में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है, बल्कि वह नए सिरे से हथियार और गोला-बारूद भी जमा कर रहा है.

कुछ विश्लेषकों को लगता है कि लेबनान की घरेलू राजनीति में अपने बढ़ते वज़न को देखते हुए हिज़बुल्ला किसी नए विवाद में उलझना नहीं चाहेगा.

वहीं इसराइली सेना के कुछ अधिकारियों को लगता है कि निकट भविष्य में हिज़बुल्ला से एक और टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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