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वामदलों ने माँगी प्रधानमंत्री से सफ़ाई

By Staff
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वामपंथी कहते रहे हैं कि सरकार परमाणु समझौते को लेकर पारदर्शी नहीं है
गुरुवार को एक पत्रकारवार्ता में वामदलों के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ समझौते के मसौदे पर सरकार पर कई तरह के झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा है कि की प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि उनकी अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से क्या बात हुई है.

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के बारे में उन्होंने कहा है कि उनकी स्थिति अब ऐसी हो गई है जिसका बचाव नहीं किया जा सकता.

उधर भारतीय जनता पार्टी ने भी कई सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सरकार ने देश को धोखा दिया है.

कांग्रेस ने इन आरोपों के जवाब में कहा है कि यह देश के साथ धोखा नहीं है बल्कि सरकार सामान्य प्रक्रिया का पालन कर रही है.

वामदलों का आरोप

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा कि आठ जुलाई को जब वामपंथियों ने समर्थन वापसी की घोषणा की थी तो विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि सरकार तब तक आईएईए में नहीं जाएगी जब तक वह संसद में विश्वासमत हासिल न कर ले.

यूपीए-वामदलों की समिति के दस्तावेजों को वामदलों ने सार्वजनिक कर दिया है

उनका कहना है कि प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री से भी बात की है लेकिन 24 घंटों से भी कम समय में सरकार ने आईएईए से कहा कि वे समझौते का समौदा प्रबंध समिति के सदस्यों को भेज दें.

प्रकाश कारत ने कहा, "हमें प्रणव मुखर्जी की ईमानदारी पर कोई शंका नहीं लेकिन हम जानना चाहते हैं कि बुधवार की सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति के बीच ऐसी क्या बात हुई कि सरकार को तुरंत आईएईए में जाना पड़ा."

लेकिन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव एबी बर्धन ने कहा कि विदेश मंत्री प्रवण मुखर्जी की स्थित ऐसी हो गई है जिसका बचाव नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा, "प्रणव मुखर्जी ने दो बातें कीं, एक वामदलों को दिए पत्र में उन्होंने कहा कि 10 जुलाई की बैठक में आईएईए में जाने का फ़ैसला करेंगे लेकिन प्रधानमंत्री ने इससे पहले ही घोषणा कर दी कि सरकार आईएईए में जा रही है और दूसरा वादा उन्होंने देश के सामने किया कि सरकार विश्वासमत हासिल किए बिना आईएईए में नहीं जाएगी लेकिन बुश से बात के बाद सरकार वहाँ भी चली गई."

कई झूठ

सीपीएम महासचिव ने सरकार पर आरोप लगाया कि आईएईए को लेकर सरकार कई तरह के झूठ बोल रही है.

सरकार को यदि झूࢠ बोलना है तो एक ही तरह का झूࢠ बोलना चाहिए न कि कई तरह के झूࢠ

उन्होंने कहा, "सरकार को यदि झूठ बोलना है तो एक ही तरह का झूठ बोलना चाहिए न कि कई तरह के झूठ."

उनका कहना था कि सरकार की ओर वियना में कुछ कहा जा रहा है, कांग्रेस का प्रवक्ता कुछ और कह रहा है और सरकार का एक वरिष्ठ मंत्री कुछ और कह रहा है.

प्रकाश कारत ने कहा, "जब हम कह रहे हैं कि हम इस समझौते को रोकने के लिए संघर्ष करेंगे तो हमारा मतलब सिर्फ़ संसद में विश्वासमत के ख़िलाफ़ मत देने से नहीं है."

उन्होंने कहा, "हमें इस समझौते को रोकने के कई तरीक़े मालूम हैं और हम इसे रोकने के लिए हर तरह की राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे."

यूपीए और वामपंथी दलों की समन्वय समिति की नौ बैठकों का ज़िक्र करते हुए प्रकाश करात ने कहा कि इन बैठकों में सरकार ने वामदलों को कई दस्तावेज़ दिए लेकिन आईएईए के साथ समझौते का मसौदा नहीं दिया.

इन बैठकों में वामदलों के उठाए सवालों और उन पर यूपीए सरकार के जवाबों के सारे दस्तावेज़ों वामदलों ने पुस्तकाकार प्रकाशित कर दिया है और इसे प्रकाश कारत ने पत्रकारवार्ता में जारी कर दिया.

उन्होंने कहा कि आईएईए के मसौदे का वे अध्ययन कर रहे हैं और इसके हर पहलू का अध्ययन करने के बाद वे एक बार फिर मीडिया के पास आएँगे.

'धोखा' और 'प्रक्रिया'

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने आईएईए में जाने के सरकार के फ़ैसले को देश के साथ 'आधी रात हुआ धोखा' कहा है.

कुछ हुआ वह देश के साथ कोई धोखा नहीं है बल्कि सरकार एक प्रक्रिया के तहत आईएईए के प्रबंध समिति के पास गई है

उन्होंने एक टेलीविज़न चैनल से कहा कि सरकार परमाणु समझौते पर जो कुछ कर रही है उसके बारे में प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए.

उनका कहना था कि परमाणु समझौते पर सरकार संसद में अपना बहुमत खो चुकी है.

उनका कहना था, "प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी को इसका जवाब देना होगा."

लेकिन कांग्रेस के नेता वीरप्पा मोइली ने इन आरोपों का खंडन किया है.

उनका कहना था कि जो कुछ हुआ वह देश के साथ कोई धोखा नहीं है बल्कि सरकार एक प्रक्रिया के तहत आईएईए के प्रबंध समिति के पास गई है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के हित में जो किया है उसे धोखे की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, "सरकार के विश्वासमत हासिल किए बिना आईएईए के प्रबंध समिति की बैठक नहीं होगी."

इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच कांग्रेस के आलानेताओं के बीच चर्चाएँ चल रही हैं और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गुरुवार की शाम राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से कहा है कि वे गुरुवार को उनसे मुलाक़ात करें.

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