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'हनीफ़ पर आरोप नहीं लगना चाहिए था'

By Staff
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हनीफ़ को नाकाम चरमपंथी मामले में पकड़ा गया था
सार्वजनिक किए गए दस्तावेज़ों में कहा गया है कि डॉक्टर हनीफ़ के ख़िलाफ़ सुबूत पर्याप्त नहीं थे.

डॉक्टर हनीफ़ के ख़िलाफ़ जाँच में लाखों डॉलर खर्च किए गए और करीब 450 अधिकारी इस मामले में जुड़े हुए थे.

लेकिन आख़िरकर उनके ख़िलाफ़ आरोप वापस ले लिए गए थे. इस मामले का अब अदालत में रिव्यू चल रहा है.

जाँच के दौरान पुलिस ने कहा है, "क्वींसलैंड पुलिस सर्विस का ये मत था कि डॉक्टर हनीफ़ के ख़िलाफ़ सुबूत अपर्याप्त थे."

पुलिस ने मोहम्मद हनीफ़ को पिछले साल जुलाई में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में गिरफ़्तार किया था और उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने फ़ोन का सिम कार्ड ब्रिटेन में संदिग्ध चरमपंथियों को दिया है. पु

अभियोजक पक्ष का दावा था कि ये सिम कार्ड ग्लास्गो हवाईअड्डे पर मिला था जहाँ हमले की योजना थी.

लेकिन ये झूठ साबित हुआ और जैसे ही मीडिया ने ये बात सार्वजनिक की, हनीफ़ के ख़िलाफ़ मामला ढीला हो गया.

उन्हें दो हफ़्ते तक हिरासत में रखा गया और फिर उन पर आरोप दर्ज किया गया कि उन्होंने आतंकवादी संगठन का समर्थन किया था. मोहम्मद हनीफ़ का वीज़ा रद्द कर दिया गया था.

बाद में ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने मोहम्मद हनीफ़ के ख़िलाफ़ मामला वापस लेने की घोषणा की थी और यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में ग़लती हुई है.

बाद में वीज़ा बहाल कर दिया गया था.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने केंद्रीय जाँचकर्ताओं को तीन बार बताया था कि उन्हें नहीं लगता कि हनीफ़ के ख़िलाफ़ आरोप साबित किए जा सकते हैं.

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