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लक्ष्‍य 2050: ग्रीनहाउस गैसों का उत्‍सर्जन आधा करेंगे

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G-8 leaders
टोयाको, 10 जुलाई: ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन को 2050 तक आधा करने का लक्ष्‍य रखा गया है। विश्‍व के बड़े औद्योगिक देशों के संगठन जी-8 के सदस्य देशों और दुनिया के आठ प्रमुख विकासशील देशों ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए इस पर प्रतिबद्ध होकर हामी भरी है। हालांकि जी-8 में इस संबंध में कोई विशेष लक्ष्‍य नहीं रखा गया है।

जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन में की जाने वाली भारी कटौती के लिए जी-8 किसी विशेष लक्ष्य को निर्धारित करने में विफल रहा। जबकि सच पूछें तो ग्रीनहाउस गैसों के उत्‍सर्जन को सभी देश अपने स्‍तर पर रोक सकते हैं।

जी-8 के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा पर हुई बैठक में जी-8 के साथ भारत, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील,चीन, मैक्सिको, आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया के नेताओं साथ ही संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और अतंर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के प्रमुख भी शामिल हुए।

दुनिया के 16 देशोंने कहा है कि जलवायु परिवर्तन विश्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। विकसित और विकासशील देशों के नेता इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास के लिए सहमत हैं। लेकिन इसके लिए प्रत्येक देश अपनी जिम्मेदारी और क्षमता के हिसाब से काम करेगा।

जी-8 ने अपने एक बयान में कहा था कि वे 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की मात्रा को घटाकर आधी किए जाने की मांग करेंगे।भारत और चीन जैसे देश उत्सर्जन में कटौती की जिम्मेदारी स्वीकार करना नहीं चाहते हैं। पर्यावरण संगठनों ने भी निराशा व्यक्त की है।

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए आधार वर्ष के निर्धारण पर भी सम्मेलन में सहमति नहीं बन पाई। इस पर भी अलग-अलग देशों की राय भिन्‍न है।

उधर भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ने जलवायु परिवर्तन पर अमरीका के राष्‍ट्रपति जार्ज बुश का तर्क भी ठुकरा दिया। मनमोहन सिंह का कहना है कि फिलहाल तो उत्सर्जन स्तर में कटौती करने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।

यह जरूर है कि इसकी बजाए जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने के लिए औद्योगिक देशों को ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जो वैज्ञानिकों के मुताबिक, वायुमंडल में बढ़ती गर्मी के लिए जिम्मेदार हैं।

प्रधानमंत्री के मुताबिक विकसित देशों द्वारा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के बजाए उनके द्वारा किया जाने वाला उत्सर्जन हाल के वर्षो में बढ़ा ही है। राष्ट्रपति बुश इस बात पर अड़े हुए हैं कि वह कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में कटौती को तब तक स्वीकार नहीं करेंगे, जब तक भारत और चीन जैसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं वाले देश भी इसके लिए राजी नहीं होते।

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