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समर्थन वापसी का पत्र सौंपेंगे वामदल

By Staff
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राष्ट्रपति बनने के बाद प्रतिभा पाटिल के सामने पहला राजनीतिक मसला फ़ैसले के लिए आएगा
अमरीका से असैन्य परमाणु समझौते का विरोध कर रहे वामदलों ने मंगलवार को समर्थन वापसी की घोषणा कर दी थी.

वे यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे और सरकार उनके समर्थन के पत्र के आधार पर ही बनी और चल रही थी.

वामदलों के समर्थन वापसी की अटकलों के बीच समाजवादी पार्टी को समर्थन देने के लिए राज़ी कर चुके यूपीए सरकार के कर्ताधर्ताओं ने दावा किया है कि सरकार को कोई ख़तरा नहीं है और सरकार संसद में विश्वासमत साबित करेगी.

एक ओर सवा चार साल पुरानी यूपीए सरकार के सामने यह सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है और दूसरी और राष्ट्रपति बनने के बाद प्रतिभा देवी पाटिल के सामने यह पहला राजनीतिक मसला है जिस पर उन्हें फ़ैसला लेना है.

समर्थन वापसी

वामदलों के नेता यूपीए सरकार के साथ समन्वय समिति की बैठकों में अमरीका के साथ असैन्य परमाणु समझौते पर चर्चा कर रहे थे और लगातार अपना विरोध जता रहे थे.

यूपीए के नेता वामदलों को राज़ी करने में विफल रहे

उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार परमाणु समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ अंतिम दौर की बातचीत की दिशा में क़दम बढ़ाती है तो वे यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे.

आईएईए के साथ बातचीत की प्रगति के विषय में जानकारी देने के लिए उन्होंने यूपीए को सात जुलाई तक का समय दिया था.

इस समय सीमा में सरकार की ओर से जवाब तो नहीं आया लेकिन जापान में जी-8 सम्मेलन में भाग लेने जा रहे प्रधानमंत्री ने घोषणा कर दी कि सरकार आईएईए से जल्दी ही बातचीत करने जा रही है.

इसके बाद मंगलवार को वामदलों ने यूपीए सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी.

वामदलों का कहना है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौता देशहित में नहीं है और इससे देश की संप्रभुता और परमाणु मामले में आत्मनिर्भरता को ख़तरा है.

लेकिन यूपीए सरकार का कहना है कि परमाणु समझौता देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ज़रुरी है और देश का हित इसी में है.

अंकगणित और विश्वासमत

पहले माना जा रहा था कि 59 सदस्यों वाले वाममोर्चे के समर्थन वापसी से यूपीए सरकार अल्पमत में आ जाएगी और उसका गिरना तय है.

लेकिन वामदलों की समर्थन वापसी की धमकियों के बीच यूपीए के रणनीतिकारों ने 39 सदस्यों वाली समाजवादी पार्टी को मना लिया.

अब यूपीए के कर्ताधर्ता दावा कर रहे हैं कि यूपीए सरकार को कोई ख़तरा नहीं है.

पिछले हफ़्ते जब भारतीय जनता पार्टी ने सरकार से विश्वासमत हासिल करने को कहा था तो कांग्रेस की तीख़ी प्रतिक्रिया आई थी.

लोकसभा में गणित यूपीए - 224 एनडीए - 170 वामदल - 59 सपा - 39 जेडी(एस) - 3 आरएलडी - 3 टीआरएड - 3 बसपा - 17 एजीपी - 2 टीडीपी - 5 एनसी - 2 एमडीएमके - 4 निर्दलीय - 6 अन्य दल - 6

लेकिन इस बीच सरकार ने अंकों का जो गणित बिठाया है उसके बाद वह आत्मविश्वास के साथ कह रही है कि वे विश्वासमत हासिल करेंगे.

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को घोषणा की है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को जैसे ही राष्ट्रपति भवन से वामदलों के समर्थन वापसी की औपचारिक सूचना दी जाती है, वैसे ही सरकार जल्द से जल्द लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर विश्वास प्रस्ताव रखेगी.

यूपीए-वाम की समनवय समिति के संयोजक रहे प्रणव मुखर्जी ने संवाददाताओं को बताया,"ग्यारह सितंबर से शुरु होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा. इसमें सरकार विश्वास प्रस्ताव लाएगी. इसकी तारीख़ संसदीय प्रक्रिया के तहत बाद में तय होगी."

इसके बाद सरकार के विश्वास प्रस्ताव लाने की संभावना को देखते हुए मुख्य राजनीतिक दलों की गतिविधियाँ, सांसदों से चर्चा, और बैठकों का दौर तेज़ हो गया.

राजनीतिक हलकों में ख़लबली का कारण ये है कि वामदलों के समर्थन वापस लेने से लोकसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं रह जाता है, जब तक कि वह अपना बहुमत फिर से साबित न कर दे.

लोकसभा की 545 सीटों में से दो रिक्त हैं.

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के साथ 543 लोकसभा सदस्यों में से 224 हैं जबकि वाम दलों के 59 और उनके सहयोगी केरल कांग्रेस (थामस) के दो सदस्यों का समर्थन यूपीए को हासिल नहीं है.

इस तरह से जहाँ बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन चाहिए वहाँ यूपीए के 224 सांसदों के साथ यदि समाजवादी पार्टी के सभी 39 सांसद भी जुड़ जाएँ, तब भी यूपीए को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम नौ अन्य सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा.

यदि कांग्रेस को राष्ट्रीय लोकदल के तीन, जनता दल (एस) के तीन और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के तीन सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो सरकार को 272 सांसदों का समर्थन और लोकसभा में बहुमत मिल जाएगी.

यूपीए इन्ही दलों से और निर्दलीयों से समर्थन जुटाने में लगी हुई है जबकि सभी दलों का नेतृत्व अपने सांसदों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक चलाने के प्रयास में जुटे हुए हैं.

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