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'विशेष सत्र में लाएंगे विश्वास प्रस्ताव'

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सरकार पिछले साढ़े चार साल तक बहुमत के लिए वामदलों के 59 सांसदों के समर्थन पर निर्भर थी
यूपीए-वाम की समनवय समिति के संयोजक रहे प्रणव मुखर्जी ने संवाददाताओं को बताया,"ग्यारह सितंबर से शुरु होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा. इसमें सरकार विश्वास प्रस्ताव लाएगी. इसकी तारीख़ संसदीय प्रक्रिया के तहत बाद में तय होगी."

प्रणव मुखर्जी का कहना था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ फ़ोन पर बात करने के बाद ये घोषणा की है. उनका ये भी कहना था कि सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के पास विश्वास मत हासिल करने के बाद ही जाएगी.

ग्यारह सितंबर से शुरु होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा. इसमें सरकार विश्वास प्रस्ताव लाएगी. इसकी तारीख़ संसदीय प्रक्रिया के तहत बाद में तय होगी

इससे पहले मंगलवार सुबह भारत-अमरीका परमाणु मुद्दे पर वाम मोर्चे ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा की थी.

इसके बाद सरकार के विश्वास प्रस्ताव लाने की संभावना को देखते हुए दिन भर मुख्य राजनीतिक दल की गतिविधियाँ, सांसदों से चर्चा, और बैठकों का दौर तेज़ हो गया.

राजनीतिक हलकों में ख़लबली का कारण ये है कि वाम दलों के समर्थन वापस लेने से लोकसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं रह जाता है, जब तक कि वह अपना बहुमत पुन: साबित न कर दे.

लोकसभा की 545 सीटों में से दो रिक्त हैं. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के साथ 543 लोकसभा सदस्यों में से 224 हैं जबकि वाम दलों के 59 और उनके सहयोगी केरल कांग्रेस (थामस) के दो सदस्यों का समर्थन यूपीए को हासिल नहीं है.

यूपीए की नज़रे आरएलडी के तीन, जेडी(एस) के तीन और टीआरएस के तीन सांसदों पर टिकी हैं इस तरह से जहाँ बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन चाहिए वहाँ यूपीए के 224 सांसदों के साथ यदि समाजवादी पार्टी के सभी 39 सांसद भी जुड़ जाएँ, तब भी यूपीए को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम नौ अन्य सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा.

'यूपीए विश्वास मत हासिल करे'

वाम मोर्चे ने घोषणा की है कि बुधवार को औपचारिक तौर पर राष्ट्रपति को मिलकर वे यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने का पत्र उन्हें सौंप देंगे. उनका यूपीए पर आरोप है कि प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि सरकार आईएईए में जाकर अंतिम दौर की वार्ता में भाग लेगी और ये यूपीए-वाम के बीच इस मुद्दे पर हुए समझौते का उल्लंघन है.

इसी के साथ विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने माँग रखी कि इस घोषणा के बाद प्रधानमंत्री को संसद में बहुमत साबित करनी चाहिए.

लोकसभा में गणित यूपीए - 224 एनडीए - 170 वामदल - 59 सपा - 39 जेडी(एस) - 3 आरएलडी - 3 टीआरएड - 3 बसपा - 17 एजीपी - 2 टीडीपी - 5 एनसी - 2 एमडीएमके - 4 निर्दलीय - 6 अन्य दल - 6

साथ ही भाजपा ने बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि इसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेता भी शामिल हो सकते हैं.

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "वाम के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री को संसद में विश्वास मत हासिल करना चाहिए. हम कल आडवाणी जी के निवास पर चर्चा के लिए मिल रहे हैं."

समाजवादी पार्टी सांसदों की बैठक

उधर समाजवादी पार्टी ने वामदलों की घोषणा के केवल एक घंटे बाद ही कहा कि परमाणु समझौते के मुद्दे पर उनके सांसद यूपीए सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे.

समाजवादी पार्टी महासचिव अमर सिंह ने दिल्ली में अपने संसदीय दल की बैठक के बाद कहा, "सदन में मत विभाजन की स्थिति में पार्टी व्हिप के ज़रिए हमारा एक-एक सांसद सरकार को बचाने के लिए मत डालेगा."

उधर कांग्रेस की ओर से वामदलों की समर्थन वापसी पर तीख़ी प्रतिक्रिया आई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने कहा, "प्रधानमंत्री ने क्या ग़लती की है. जापान में वे केवल एक प्रक्रिया की बात कर रहे थे और जहाँ तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में जाने का सवाल है, तो भारत पहले से ही आईएईए के पास गया है. विदेश यात्रा पर प्रधानमंत्री को इस तरह शर्मिंदा करना उचित नहीं."

उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुधवार को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मुलाक़ात कर भारत वापस लौटेंगे. वामपंथी दलों के समर्थन वापसी पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान में कहा है कि इससे उनकी सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

क्या है गणित?

वाम के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री को संसद में विश्वास मत हासिल करना चाहिए. हम कल आडवाणी जी के निवास पर चर्चा के लिए मिल रहे हैं

यदि लोकसभा में गणित पर ध्यान दिया जाए तो ये स्पष्ट है कि बहुमत जुटाने के लिए यूपीए को कुछ न कुछ मशक्कत ज़रूर करनी पड़ सकती है.

लोकसभा के 543 सदस्यों में यूपीए के कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस, पीएमके, जेएमएम, पीडीपी और चार कम सदस्यों वाले छोटे दलों के 224 सांसद हैं. वाम मोर्चे के 59 सांसद और उनके दो सहयोगी केरल कांग्रेस के सांसद अब सरकार के साथ नहीं हैं.

लेकिन समाजवादी पार्टी के 39 सांसदों के समर्थन के साथ यूपीए को कुल 263 सांसदों का समर्थन हासिल हो जाता है. यदि कांग्रेस को राष्ट्रीय लोक दल के तीन, जनता दल (एस) के तीन और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के तीन सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो सरकार को 272 सांसदों का समर्थन और लोकसभा में बहुमत मिल जाएगी.

यूपीए इन्ही दलों से और निर्दलीयों से समर्थन जुटाने में लगी हुई है जबकि सभी दलों का नेतृत्व अपने सांसदों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक चलाने के प्रयास में जुटे हुए हैं. यही कारण है राजनीतिक हलकों में खलबली का.

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