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पहले फील्ड मार्शल सैम बहादुर को सलाम

Sam Bahadur
नई दिल्ली, 27 जूनः सेना के पूर्व प्रमुख एवं वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के हीरो पहले फील्ड मार्शल सैम मानिक शॉ के निधन के साथ ही एक युग का अंत हो गया। वे एक कुशल कमांडर के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।

मानेक शॉ का जीवन उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने देश के लिए कई जंगों में निर्णायक भूमिका निभाई। फिल्ड मार्शल मानेक शॉ का पूरा नाम सैम होर्मुशजी फ्रेमजी जमशेदजी मानिक शॉ था। उनका जन्म तीन अप्रैल 1914 को अमृतसर में हुआ था।

मानेक शॉ का निधन शुक्रवार तड़के तमिलनाडु के वेलिंग्टन में सेना अस्पताल में हुआ। वे पिछले कुछ वर्षो से वृद्धावस्था में होने वाली कई बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका इलाज नई दिल्ली के सेना अस्पताल और वेलिंग्टन स्थित अस्पताल में किया जा रहा था।

मानेक शॉ की सबसे बड़ी कामयाबी 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में जीत मानी जाती है। उस समय 90 हजार से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

मानेक शॉ खुलकर अपनी बात कहने वालों में से थे। उन्होंने एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 'मैडम' कहने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यह संबोधन 'एक खास वर्ग' के लिए होता है। मॉनेक शॉ ने कहा कि वह उन्हें प्रधानमंत्री ही कहेंगे।

मॉनेक शॉ ने प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में पाई, बाद में वे नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में दाखिल हो गए। वे देहरादून के इंडियन मिलिट्री एकेडमी के पहले बैच के लिए चुने गए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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