• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

एमके पंधे की चेतावनी निंदनीय है

By संजीव श्रीवास्तव
|
परमाणु करार समझौते का वामदल विरोध कर रहे हैं
भारत में लगभग सभी राजनीतिक दल मौका पड़ने पर और अपने लाभ के लिए जाति और धर्म से जुड़े मामले उठाने से नहीं चूकते.

भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना आदि पर तो हमेशा से ही सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगा है और ये आरोप सही भी होते हैं.

कांग्रेस भी समय-समय पर इस तरह के क़दम उठाती रही है कि उस पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया गया है. कांग्रेस के ख़िलाफ़ भी कई आरोपों में काफ़ी दम होता है.

वामदल भी अब तक इन आरोपों से अछूते नहीं थे पर सीपीएम के पोलित ब्यूरो के सदस्य एमके पंधे ने सोमवार को परमाणु करार के संदर्भ में जिस तरह समाजवादी पार्टी को चेतावनी दी है उसके बाद उन्हें धर्म को राजनीति से अलग रखने जैसी बातें कहने और सार्वजनिक नैतिकता के उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं रह जाता.

हैरानी की बात है कि हिंदुत्व की बात करने वाली बीजेपी भी परमाणु करार के ख़िलाफ़ है

इससे ज़्यादा आप किसी भी सार्वजनिक बहस और चर्चा को सांप्रदायिक और धार्मिक जामा क्या पहनाएँगे कि परमाणु करार के ख़िलाफ़ देश के सभी मुसलमानों को लामबंद करने का प्रयास करें.

वामदलों को परमाणु करार का विरोध करने का उतना ही अधिकार है जितना कि कांग्रेस को इस समझौते का समर्थन करने का.

पर वामदलों को, या कहिए श्री पंधे को, जिनके बयान की आलोचना वाममोर्चे के किसी भी नेता ने अब तक नहीं की है, यह अधिकार किसने दिया है कि वह इस मामले को हिंदु-मुस्लिम या सांप्रदायिक जामा पहनाएँ.

मतभेद

परमाणु करार के बारे में लोगों को शिक्षित करने की ज़रूरत है

क्या वामदल के नेताओं का यह मानना है कि उत्तर प्रदेश और भारत का हर मुसलमान न सिर्फ़ अमरीका विरोधी है बल्कि अमरीका के साथ होने वाले किसी भी समझौते का वह हर क़ीमत पर विरोध करेगा.

न सिर्फ़ समझौते का विरोध करेगा बल्कि हर उस राजनीतिक दल और व्यक्ति के विरुद्ध हो जाएगा जो परमाणु समझौते के पक्ष में हैं.

अगर इसी तर्क को और आगे बढ़ाया जाए तो बकौल वामदलों के भारत के मुसलमानों को भारत के हित और अहित कि चिंता नहीं होगी.

वह परमाणु करार को सिर्फ़ अपने अमरीकी विरोधी चश्मे कि नज़र से देखेगें और हर उस राजनीतिक दल के ख़िलाफ़ खड़े हो जाएँगे जो परमाणु करार के समर्थन में हैं.

अगर इसी तर्क को हम और आगे बढ़ाएं, कुतर्क की सीमा तक, तो फिर इस आधार पर तो सभी हिंदुओं को शायद परमाणु करार के समर्थन में होना चाहिए.

सीपीएम के पोलित ब्यूरो के सदस्य एम के पंधे ने सोमवार को परमाणु करार के संदर्भ में जिस तरह समाजवादी पार्टी को चेतावनी दी है उसके बाद उन्हें धर्म को राजनीति से अलग रखने जैसी बातें कहने और सार्वजनिक नैतिकता के उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं रह जाता

पर हैरानी की बात है कि हिंदुत्व की बात करने वाली बीजेपी भी परमाणु करार के ख़िलाफ़ है.

कुल मिला कर बात यह है कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाले वाम दल के नेता भी अपने सिद्धांत का झंडा ऊँचा रखने के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं.

यह तो देश कि ख़ुशक़िस्मती है कि हिंदु या मुसलमान कोई भी इन नेताओं की सोच-समझ या फिर यह कहिए कि इन नेताओं ने जो उनकी स्टिरीयोटाइप छवि बनाई हुई है उस पर खरे नहीं उतरते.

बेहतर होगा कि ये राजनेता परमाणु करार के मामले पर मुसलमान हों या हिंदु... सभी को अपने मत से परिचित कराएँ और राष्ट्रहित के संदर्भ में उन्हें शिक्षित करें और अपने पक्ष में समर्थन जुटाएँ.

पहले ही सार्वजनिक मामलों को धार्मिक भावनाओं और उन्माद से जोड़ने की भारतीय राजनीतिज्ञों की नासमझी की बड़ी क़ीमत देश अदा कर चुका है.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more