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परमाणु करार ही क्यों, गैस पाइप लाइन क्यों नहीं! : माकपा

By Staff
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नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। वामपंथी दलों का मानना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए सिर्फ भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता ही जरूरी नहीं है, बल्कि भारत-पाकिस्तान-ईरान (आईपीआई)गैस पाइपलाइन परियोजना से भी ऐसा संभव है।

नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। वामपंथी दलों का मानना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए सिर्फ भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता ही जरूरी नहीं है, बल्कि भारत-पाकिस्तान-ईरान (आईपीआई)गैस पाइपलाइन परियोजना से भी ऐसा संभव है।

वामपंथी दलों ने सरकार से मांग की है कि विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की 29-30 जुलाई की प्रस्तावित तेहरान यात्रा में ही इस गैस पाइपलाइन परियोजना को अंतिम रूप दिया जाए। उनका कहना है कि भारत सरकार यदि ऐसा कर पाती है, तो इससे स्पष्ट हो जाएगा कि वह अमेरिकी दबाव में नहीं है। मुखर्जी को भारत-ईरान संयुक्त कमीशन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए तेहरान जाना है।

प्रमुख वामपंथी दल मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मुखपत्र 'लोकलहर' के ताजा अंक के संपादकीय में भारत-पाकिस्तान-ईरान गैस पाइप लाइन परियोजना की जमकर पैरोकारी की गई है। इसमें यह सवाल उठाया गया है, अगर केंद्र सरकार की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंता इतनी ही ज्यादा महत्वपूर्ण है, तो क्यों नहीं गैस पाइपलाइन परियोजना को अब तक अमली जामा पहनाया गया।

इस अंक में वामपंथियों ने अमेरिका के साथ परमाणु करार करने की कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की बेकरारी को अमेरिकी दबाव का प्रतिफल बताया है। इसमें कहा गया है, करार करने को बेकरार संप्रग सरकार यदि इस अवधारणा को नकारना चाहती है कि वह अमेरिका के दबाव के सामने घुटने टेक रही है, तो हमारे विदेश मंत्री को आगामी तेहरान यात्रा में ही गैस पाइपलाइन समझौते को अंतिम रूप दे देना चाहिए।

माकपा का मानना है कि भारत की उर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गैस पाइपलाइन परियोजना बेहतरीन विकल्प है। जानकारों के साथ सरकार भी इस सच्चाई को समझती है, लेकिन इसके बावजूद परियोजना को आगे न बढ़ाया जाना स्वाभाविक रूप से संदेह जगाता है कि ऐसा अमेरिका के दबाव में तो नहीं हो रहा है, क्योंकि अमेरिकी साम्राज्यवाद ने ईरान को निशाना बना रखा है और ईरान के खिलाफ पाबंदियां थोपकर वह इराक प्रकरण को वहां दोहराना चाहता है।

वामदलों ने गैस पाइपलाइन परियोजना की राह में आड़े आ रही समस्याओं को सुलझाने की पुरजोर वकालत की है। इसके लिए ईरान के साथ-साथ पाकिस्तान से भी बातचीत करने की सलाह दी गई है ताकि पारगमन शुल्क के मुद्दे पर दोनों देशों के मतभेद दूर हो सके।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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