भारत का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक पोल. क्या आपने भाग लिया?
  • search

'एएनसी ज़िम्बाब्वे स्थिति पर निराश'

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts
    विपक्षी नेता मॉर्गन चांगिरई ने दूतावास में शरण ली है
    ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति चुनाव पर उठे विवाद पर अभी तक के अपने सबसे कड़े बयान में एएनसी ने कहा है कि इस संकट का अगर कोई हल निकल सकता है तो वो सिर्फ़ बातचीत के ज़रिए.

    ज़िम्बाब्वे की विपक्षी पार्टी - मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज (एमडीसी) ने शुक्रवार को प्रस्ताविच चुनावों से ख़ुद को औपचारिक रूप से बाहर कर लिया है.

    एमडीसी के नेता मॉर्गन चांगरई ने कहा कि वह देश में व्यापक राजनीतिक हिंसा की वजह से चुनावी दौड़ से ख़ुद को बाहर कर रहे हैं. एमडीसी ने मंगलवार को कहा कि इस बारे में एक पत्र चुनाव आयोग को सौंप दिया गया है.

    एएनसी की निराशा

    एएनसी के नेता जैकब ज़ूमा ने एक अलग वक्तव्य जारी करके कहा है कि ज़िम्बाब्वे में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए हैं. पार्टी ने कहा है कि ज़िम्बाब्वे सरकार बहुत मुश्किल से हासिल किए गए लोकतांत्रिक अधिकारों को कलंकित कर रही है.

    मुगाबे पर काफ़ी अंतरराष्ट्रीय दबाव है

    अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के इस बयान से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक सख़्त बयान आया था जिसमें कहा गया था कि ज़िम्बाब्वे में विपक्ष के ख़िलाफ़ हो रही राजनीतिक हिंसा की वजह से देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव असभंव हो गए हैं.

    जोहन्सबर्ग में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि एएनसी की तरफ़ से इस तरह का सख़्त बयान यह दिखाता है कि ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे अपने ही क्षेत्र में किस तरह से अलग-थलग पड़ते नज़र आ रहे हैं क्योंकि दक्षिण अफ्रीका उस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देश है.

    पार्टी ने जिंबाबवे में हिंसा, ज़ोर ज़बरदस्ती और डर के माहौल के पुख़्ता सबूतों की और इशारा किया. साथ ही एएनसी का मानना है कि राष्ट्रपति चुनने के लिए फिर से चुनाव करवाने से समस्या का हल नहीं निकलेगा.

    उसके अनुसार चुनावों की विश्वसनीयता और वैधता पर वैसे भी सवालिया निशान लग चुका है. तो इस संकट का हल सिर्फ बातचीत से ही निकल सकता है.

    सुरक्षा परिषद प्रस्ताव

    उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से पारित एक प्रस्ताव में कहा है कि ज़िम्बाब्वे में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीक़े से राष्ट्रपति पद के चुनाव कराना असंभव है.

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्यों ने सर्वसम्मति से जारी किए एक बयान में ज़िम्बाब्वे में विपक्षी दलों के खिलाफ हिंसा और उन्हें धमकियाँ दिए जाने की कड़ी निंदा की है. ऐसा पहली बार हुआ है कि दक्षिण अफ़्रीका, रूस और चीन ने भी ज़िम्बाब्वे की कड़ी आलोचना की है.

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीकी राजदूत ज़ल्मय ख़लीलज़ाद ने कहा है कि सुरक्षा परिषद ने ज़िम्बाब्वे की सरकार को एक कड़ा संदेश भेजा है. परिषद द्वारा जारी किए गए इस बयान को ख़लीलज़ाद ने पढ़कर सुनाया, "सुरक्षापरिषद बड़े अफसोस के साथ ये घोषणा करती है कि ज़िम्बाब्वे में राजनीतिक विपक्ष के खिलाफ़ चल रहे हिंसक अभियान और उन पर लगी पाबंदियों की वजह से 27 जून को देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हो पाना असंभव हो गया है. परिषद का ये भी मानना है कि ज़िंबाब्वे की सरकार को कानूनन अपनी जनता के हितों का ध्यान रखते ही होगा."

    ज़ल्मय ख़लीलज़ाद ने कहा कि ज़िंबाब्वे में चुनावी हिंसा बंद होनी चाहिए, सुरक्षा परिषद ज़िम्बाब्वे की इस बात के लिए कड़ी आलोचना करती है कि उसने विपक्ष को स्वतंत्र तौर पर चुनाव प्रचार का अधिकार नहीं दिया."

    "परिषद ज़िम्बाब्वे सरकार से ये अपील भी करती है कि वो विपक्ष को धमाकाना बंद करे, उसके खिलाफ़ हिंसा बंद करे, विपक्षी नेताओं पर लगी पांबदिया उठाए और हिरासत में लिए गए विपक्षी नेताओं का रिहा करे. परिषद अंतराराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षको से भी अपील करती है कि वे मौजूदा चुनावी संकट के दैरान ज़िंबाब्वे में ही बने रहें."

    सुरक्षा परिषद ने ज़िम्बाब्वे सरकार से ये भी कहा कि वो इस चुनावी संकट के ख़ातमे के प्रयासों में अपना पूरा सहयोग दे, "सुरक्षा परिषद ज़िम्बाब्वे सरकार से आग्रह करती है कि वो संयुक्त राष्ट्र सहित सभी उन पक्षों के साथ सहयोग करे जो एक ऐसे शांतिपूर्ण रास्ते की तलाश कर रहे हैं, जिसके तहत राजनीतिक दलों के साथ बातचीत का कोई रास्ता निकाला जा सके और जनता की इच्छा के अनुरूप एक वैधानिक सरकार का गठन हो सके."

    उधर ज़िम्बाब्वे की राजधानी हरारे में डच दूतावास में शरण लिए हुए विपक्षी दल मूवमेंट फॉर डेमोक्रैटिक चेंज के नेता मॉरगन चांगिराई ने डच रेडियो को दिए इंटरव्यू में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के औपचारिक बयान का स्वागत करते हुए कहा है कि विपक्ष के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा के लिए राषट्रपति मुगाबे को साफ़तौर पर जि़म्मेदार ठहराए जाने से वे संतुष्ट हैं.

    मॉर्गन चांगिरई ने कहा, "मैं समझता हूं कि ये बहुत महत्वपूर्ण बयान है. इसमे हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों की साफ़ पहचान की गई है और इस सारी हिंसा की ज़िम्मेदारी मुगाबे के नेतृत्व पर डाली गई है. मुगाबे की इस पर क्या प्रतिक्रिया होगी, मैं नहीं जानता लेकिन मुझे यक़ीन है कि वे सर्वसम्मति से पारित इस अंतरराष्टरीय बयान का विरोध नहीं कर पाएंगे."

    संयुक्त राष्ट्र में ज़िम्बाब्वे के प्रतिनिधि बोनीफेस चिदयौसिकू ने नेटवर्क अफ्रीका को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि सुरक्षापरिषद को ज़िंबाब्वे के आंतरिक मामलों में बोलने का न तो अधिकार है और न ही जनादेश.

    उन्होंने कहा, "सवाल ये है कि क्या सुरक्षा परिषद अब दुनिया भर में होने वाले चुनावों का रैफरी बनेगा. क्या सुरक्षापरिषद के लिए अब यही काम रह गया है. बिल्कुल नहीं, संयुक्त राष्ट्र के घोषणा पत्र में ऐसा कहीं नहीं लिखा. दुनिया भर में होने वाले चुनावों में सुरक्षापरिषद को रैफरी बनने की कोई ज़रूरत नहीं.

    बोनीफेस चिदयौसिकू ने कहा कि चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही होंगे, जिससे देश में बना हुआ अनिश्चितता का माहौल ख़त्म हो और दूसरी समस्याओं पर ध्यान दिया जा सके.

    उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही होंगे. संविधान की मांग है कि देश में दूसरे दौर के राष्ट्रपतीय चुनाव हों. कितने समय तक और हम जनता को इस अनिश्चितता के माहौल में रख सकते हैं. एक सरकार के तौर पर हम चुनावों से जितनी जल्दी हो सके, निबट लेना चाहते हैं, जिससे हम उन मुद्दों पर ध्यान दे सकें जो जनता से सीधे जुड़े हैं.

    उधर विपक्षी एमडीसी के नेता मॉरगन चांगिराई ने हरारे स्थित हॉलैंड के दूतावास में शरण ले रखी है जहाँ से उन्होंने डच रेडियो को दिए इंटरव्यू में अपने वहाँ शरण लेने की वजह बताते हुए कहा, "मेरे ख़याल से लोगों को पहले पृष्टभूमि को समझ लेना चाहिए. जब हमने चुनावों से हटने की घोषणा की तो मुझे ये बताया गया कि सरकार की ओर से मेरी सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है. इसलिए मुझे ये सलाह दी गई कि मैं किसी मित्र दूतावास में जाकर शरण ले लूं."

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more