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सहारा मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

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    सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति रखने का निर्देश दिया
    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और सहारा को नोटिस भी जारी किया है.

    कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि फ़िलहाल ना तो सहारा इस ज़मीन पर कोई निर्माण कार्य करे और ना ही लखनऊ विकास प्राधिकरण कोई निर्माण को तोड़े.

    बुधवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सहारा सिटी के एक हिस्से को तोड़ दिया था. आरोप है कि सड़क की ज़मीन पर अनाधिकृत रूप से इमारत बनाई गई थी.

    लेकिन दूसरे ही दिन हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई को ग़ैर क़ानूनी करार दिया था. हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि 24 घंटे के अंदर सहारा को ये ज़मीन लौटा दी जाए. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

    निर्देश

    इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अल्तमस कबीर की खंडपीठ ने अगली सुनवाई होने तक मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश जारी किया.

    मायावती सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल अपनी अपील में कहा था कि हाई कोर्ट का आदेश उसके अधिकारक्षेत्र के बाहर है और राज्य सरकार को भी पर्याप्त समय नहीं दिया गया.

    वर्ष 1994-95 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने लखनऊ शहर की 270 एकड़ ज़मीन सहारा को दी थी. सहारा इंडिया को ये ज़मीन आम जनता के लिए एक हरित क्षेत्र विकसित करने, आवासीय मकान और कमर्शियल इमारत बनाने के लिए दी गई थी.

    राज्य सरकार का कहना है कि सहारा ने लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया है. सरकार का आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की अनुमति के बिना ही इस ज़मीन पर स्थायी निर्माण कार्य किया गया है.

    लखनऊ विकास प्राधिकरण 1997 से ही ज़मीन वापस लेने की कोशिश कर रहा है. हालाँकि सहारा प्रबंधन का कहना है कि एक सिविल कोर्ट ने इस मामले में सरकार के ख़िलाफ़ अस्थायी आदेश दिया है और मामला अभी अदालत के विचाराधीन है.

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