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'तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश ज़रूरी'

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    तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए सुविधाओं में निवेश पर ज़ोर दिया गया
    सऊदी अरब में हुई शीर्ष स्तरीय आपात बैठक में ऊर्जा मंत्रियों ने कहा कि तेल की क़ीमतें 'ख़तरनाक स्तर तक बढ़ गई हैं.'

    इस बैठक में भाग लेने वाले तीस देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए ढाँचागत सुविधाओं में निवेश करने की ज़रूरत है.

    सऊदी अरब का कहना था कि तेल की क़ीमतों में वृद्धि की वजह सप्लाई में कमी नहीं है बल्कि सटोरियों की वजह से दाम बढ़ रहे हैं, हालाँकि सऊदी अरब तेल का उत्पादन बढ़ाने पर राज़ी हो गया है.

    भारत और चीन जैसे देशों में तेल की माँग जितनी तेज़ी से बढ़ी है उतनी तेज़ी से उत्पादन नहीं बढ़ा है जिसकी वजह से क़ीमतें आसमान छू रही हैं
    ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन, भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कई अन्य देशों के नेताओं ने ज़ोर देकर कहा था कि तेल के दामों पर नियंत्रण लगाया जाना ज़रूरी है.

    जद्दा में हुई बैठक के अंत में जारी किए गए बयान में कहा गया, "तेल के क्षेत्र में पूंजी निवेश की आवश्यकता है ताकि खरीदार देशों के लिए समय पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके."

    कुछ लोगों को इस बैठक से निराशा हुई है क्योंकि इसमें दामों को कम करने की दिशा में कोई ठोस क़दम उठाने की बात नहीं कही गई है.

    वादा

    सऊदी अरब की ओर से कहा गया कि अगर ज़रूरत हुई तो वह तेल की आपूर्ति को और बढ़ा सकता है.

    शाह अब्दुल्ला उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी के लिए तैयार हुए

    दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब ने पहले ही तेल का दैनिक उत्पादन 97 लाख बैरल करने की घोषणा कर दी है, मई महीने के मुक़ाबले यह पाँच लाख बैरल प्रतिदिन की वृद्धि है.

    सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल-अज़ीज़ ने बैठक में कहा, "हम दुनिया भर के लिए उपभोक्ता की चिंता करते हैं, हम आपको आश्वस्त करना चाहते हैं कि ज़रूरत को पूरा करने के लिए हम उत्पादन बढ़ाने को तैयार हैं."

    जद्दा से बीबीसी संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि सऊदी क़दमों का स्वागत तो हो रहा है लेकिन यह मानना जल्दबाज़ी होगी कि इससे तेल के दामों में कमी आएगी.

    बैठक में भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम और तेल मंत्री मुरली देवड़ा ने भी हिस्सा लिया.

    चिदंबरम ने इस बैठक में कहा, "अगर तेल की बढ़ती कीमतों के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुज़री तो इसका सभी को नुक़सान होगा. हमारा ये पक्के तौर पर मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की मौजूदा क़ीमत ना तो तेल उत्पादक देशों और न ख़रीदार देशों के हित में है."

    अमरीका के ऊर्जा मंत्री सैमुएल बॉडमैन का कहना था, "भारत और चीन जैसे देशों में तेल की माँग जितनी तेज़ी से बढ़ी है उतनी तेज़ी से उत्पादन नहीं बढ़ा है जिसकी वजह से क़ीमतें आसमान छू रही हैं, सब इस बात पर सहमत हैं कि क़ीमतें बहुत ऊँची हैं. अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो हालत बहुत बिगड़ जाएगी."

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