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नवाज़ शरीफ़ के चुनाव लड़ने पर रोक

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नवाज़ शरीफ़ के चुनाव लड़ने पर लगी रोक
पार्टी प्रवक्ता परवेज़ रशीद के मुताबिक़ लाहौर हाई कोर्ट का कहना है कि चूँकि नवाज़ शरीफ़ को अपराध के लिए दोषी ठहराया जा चुका है इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

वर्ष 1999 में उस समय के सेनाध्यक्ष परवेज़ मुशर्रफ़ के विमान का अपहरण कराने के आरोप में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था. इसी कारण उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई थी.

इसी 'कथित विमान अपहरण की साज़िश' के बाद के घटनाक्रमों में नवाज़ शरीफ़ का तख़्तापलट हुआ था. इस महीने जून में ऐसा लगा था कि चुनाव आयोग ने नवाज़ शरीफ़ के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ़ कर दिया है. लेकिन इसे चुनौती देने वाली याचिका पर अपने फ़ैसले में लाहौर हाई कोर्ट ने पहले के आदेश को क़ायम रखा है.

चुनौती

पार्टी प्रवक्ता परवेज़ रशीद ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ गुरुवार को होने वाले उपचुनाव से पहले लाहौर हाई कोर्ट के इस फ़ैसले को चुनौती देंगे. पाकिस्तान में नेशनल असेंबली की आठ सीटों और प्रांतीय असेंबली की 30 सीटों के लिए 26 जून को चुनाव होने हैं.

लाहौर हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने नवाज़ शरीफ़ के चुनाव लड़ने के ख़िलाफ़ फ़ैसला किया. तीन घंटे चली सुनवाई के बाद खंडपीठ ने अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था लेकिन दोपहर बाद उन्होंने यह फ़ैसला सुना दिया. सैयद ख़ुर्रम शाह और नूर इलाही की अपील पर अदालत का ये फ़ैसला आया है.

अदालत में जब ये फ़ैसला सुनाया गया, उस समय वहाँ मौजूद नवाज़ शरीफ़ समर्थकों ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ और आपातकाल के समय नियुक्त जजों के ख़िलाफ़ नारे लगाए. नवाज़ शरीफ़ भी सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुए. उनका कहना था कि वे आपातकाल के समय नियुक्त जजों के सामने पेश नहीं होंगे. नवाज़ शरीफ़ के भाई शाहबाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ भी अपील की थी.

शाहबाज़ शरीफ़ इस समय पंजाब के मुख्यमंत्री हैं. लेकिन अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि जब तक चुनाव आयोग उन पर कोई निर्णय नहीं लेता, अदालत कुछ नहीं करेगी.

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