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सुप्रीम कोर्ट पहुँचा सहारा का मामला

Written By: रामदत्त त्रिपाठी
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    सहारा सिटी के एक हिस्से को तोड़ दिया गया था
    बुधवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सहारा सिटी के एक हिस्से को तोड़ दिया था. आरोप है कि सड़क की ज़मीन पर अनाधिकृत रूप से इमारत बनाई गई थी.

    लेकिन दूसरे ही दिन हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई को ग़ैर क़ानूनी करार दिया था. हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि 24 घंटे के अंदर सहारा को ये ज़मीन लौटा दी जाए. कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले पर रिपोर्ट भी मांगी है.

    इसी कारण मायावती सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. वरिष्ठ सरकारी वकील देवेंद्र उपाध्याय ने बताया है कि अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में इस अपील पर सुनवाई होगी.

    मायावती सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल अपनी अपील में कहा है कि हाई कोर्ट का आदेश उसके अधिकारक्षेत्र के बाहर है और राज्य सरकार को भी पर्याप्त समय नहीं दिया गया.

    वर्ष 1994-95 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने लखनऊ शहर की 270 एकड़ ज़मीन सहारा को दी थी. सहारा इंडिया को ये ज़मीन आम जनता के लिए एक हरित क्षेत्र विकसित करने, आवासीय मकान और कमर्शियल इमारत बनाने के लिए दी गई थी.

    राज्य सरकार का कहना है कि सहारा ने लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया है. सरकार का आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की अनुमति के बिना ही इस ज़मीन पर स्थायी निर्माण कार्य किया गया है.

    विचाराधीन मामला

    लखनऊ विकास प्राधिकरण 1997 से ही ज़मीन वापस लेने की कोशिश कर रहा है. हालाँकि सहारा प्रबंधन का कहना है कि एक सिविल कोर्ट ने इस मामले में सरकार के ख़िलाफ़ अस्थायी आदेश दिया है और मामला अभी अदालत के विचाराधीन है.

    सुब्रत राय के सहारा ग्रुप के चेयरमैन

    ऐसा लगता है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण को सहारा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से रोका गया क्योंकि सहारा के मालिकों का भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी सरकार से अच्छे रिश्ते थे.

    शीर्ष राजनेता, नौकरशाह, जज, फ़िल्म स्टार और खिलाड़ी सहारा सिटी आते-जाते रहते हैं और वहाँ आतिथ्य सत्कार का लाभ उठाते हैं.

    लेकिन वर्ष 2004 में केंद्र में भाजपा की अगुआई वाला गठबंधन चुनाव हार गया. जबकि 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह की पार्टी हार गई और समीकरण बदल गए.

    हाल ही में रिजर्व बैंक ने भी सहारा इंडिया के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाने शुरू किए हैं. दूसरी ओर मायावती सरकार सहारा को ज़मीन दिए जाने के मामले की जाँच कर रही है.

    सहारा प्रबंधन का आरोप है कि मायावती सरकार बदले की भावना से काम कर रही है. जबकि राज्य सरकार का कहना है कि वो सिर्फ़ क़ानून का पालन कर रही है. देशभर में सहारा के क़रीब चार करोड़ निवेशक हैं. सहारा कई तरह का व्यवसाय करती है.

    BBC

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