• search
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    अमेज़न पर विशेष रेडियो कार्यक्रम

    By Staff
    |
    अगर ये जंगल नहीं रहेंगे तो नदी नहीं रहेगी, हवा में ज़हर घुल जाएगा. हमारी साँसें भारी हो जाएँगी और एक दिन आएगा जब साँस लेने वाला कोई नहीं बचेगा.

    ये प्रलय की काली भविष्यवाणी नहीं है बल्कि वैज्ञानिकों ने अपने शोध के आधार पर ऐसे नतीजे निकाले हैं.

    अमेज़न के वर्षावनों और वहाँ की आबोहवा का जायज़ा लेने के लिए पिछले दिनों बीबीसी की एक टीम ब्राज़ील पहुँची थी जिसमें बीबीसी हिंदी के राजेश जोशी भी शामिल थे, उनकी विशेष रिपोर्टें.

    ***************************************************

    चार दिन तक अमेज़न नदी में नाव से छह सौ किलोमीटर की यात्रा करके बीबीसी की ये टीम सांतारेम शहर पहुँची.

    सांतारेम पारा राज्य में पड़ता है जहाँ जंगलों के विनाश ने रक्तरंजित रूप ले लिया है.

    साओ पालो से अमेज़ोनिया के मनाउस शहर तक का हवाई सफ़र अमेज़न के जंगलों के ऊपर से करना होता है.

    ***************************************************

    दुनिया के सौभाग्य और दौलत को तो एक राष्ट्र की सीमाओं में बाँधा जा सकता है लेकिन उसका दुर्भाग्य पूरी मानवता पर टूटता है.

    धरती का फेफड़ा कहे जाने वाले अमेज़न के जंगलों का उजड़ना इस फेफड़े के गलने जैसा है.

    अमेज़न का विरोधाभास का एहसास वहीं पहुँचकर होता है.

    ******************************************************

    अमेज़न को दुनिया की सबसे बड़ी नदी है. इसकी कुल लंबाई अगर जोड़ी जाए तो 18 हज़ार किलोमीटर तक पहुँचती है.

    ब्राज़ील के घने वर्षावनों से गुज़रने वाली ये नदी ढाई करोड़ से ज़्यादा लोगों की जीवन रेखा है.

    इसके किनारे छोटी छोटी बस्तियों से लेकर बड़े बड़े शहर तक बसे हुए हैं. मनाउस शहर से कई घंटे के सफ़र के बाद एक छोटी सी बस्ती पड़ती है जहाँ नदी पर तैरती दुकानें हैं.

    *******************************************************

    ब्राज़ील सरकार ने अमेज़न के जंगलों को बचाने के लिए यहीं बसे लोगों की मदद लेने का एक कार्यक्रम शुरू किया है.

    इसे बोल्सा फ़्लोरेस्ता कार्यक्रम कहा जाता है.

    ये आरक्षित वन हैं जिनमें रहने वालों को पेड़ काटने की इजाज़त नहीं होती लेकिन वो जंगलों का भरपूर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके एवज़ में सरकार उन्हें थोड़ी बहुत आर्थिक मदद देती है.

    इस योजना के आलोचक कहते हैं कि इससे अमेज़न को बचाया नहीं जा सकता क्योंकि सरकार लोगों को पेड़ बचाने के महत्व के बारे में कुछ नहीं बता रही.

    **********************************************************

    ब्राज़ील के वर्षावनों में मौसम पल-पल बदलता रहता है. अभी चिलचिलाती धूप और उमस तो अभी झमाझम बरसात.

    मीलों तक फैले घने जंगल इस मौसम चक्र को बनाए रखते हैं.

    वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर ये जंगल नहीं रहेंगे तो दुनिया में गर्मी, बारिश और सर्दी का मौसम चक्र भी टूट जाएगा.

    इसी मौसम ने अपने लगभग सभी रंग बिखेर दिए जब हम नदी किनारे एक छोटी सी बस्ती में पहुँचे.

    पारिंचिंस अमेज़न नदी के किनारे बसा एक ख़ूबसूरत शहर है.

    इस शहर को बोइ बुम्बा त्यौहार के लिए भी जाना जाता है.

    त्यौहार के दौरान पूरा शहर लाल और नीले बैल पर बाज़ी लगाने वाली दो प्रतिस्पर्धी पार्टियों में बँट जाता है.

    शहर में जगह जगह पर प्लास्टिक के ये बैल खड़े कर दिए गए हैं.

    ************************************************************

    अमेज़न नदी का पानी बढ़ने पर उसके किनारे बसे लोगों की परेशानियाँ भी बढ़ जाती हैं.

    बाहर आने जाने के लिए नावों का इस्तेमाल करना पड़ता है.

    ब्राज़ील के पारा राज्य में संतारेम शहर से कुछ ही दूर पर मछुआरों की एक बस्ती है जिनके घरों के नीचे से अमेज़न का पानी बहता रहता है.

    लगातार मूसलाधार बारिश की वजह से अमेज़न के लोगों का जीवन बहुत कठिन हो जाता है.

    अमेज़न नदी में सैकड़ों तरह के जीव जंतु और हज़ारों हज़ार क़िस्म की वनस्पतियाँ मौजूद हैं.

    यहाँ वो छोटी मगर बेहद ख़तरनाक पिराना मछलियाँ भी मिलती हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वो पूरे आदमी तक को मिनटों में चबा जाती हैं.

    ख़ास तरह के घड़ियाल घंटों तक बिना हिले डुले नदी में सन्न पड़े रहते हैं. पिराना और घड़ियालों को पकड़ना क्या बाएँ हाथ का खेल है?

    *******************************************************

    विकास या प्रकृति का संरक्षण -- ये बहस इन दिनों ब्राज़ील में ही नहीं बल्कि दुनिया के लगभग हर देश में जारी है.

    एक पक्ष का तर्क है कि मानवता को विकास की ज़रूरत है इसलिए जंगल काटे ही जाएँगे, नदियों पर बाँध बनाए ही जाएँगे.

    लेकिन पर्यावरण के लिए चिंतित पक्ष कहता है कि विकास का वही ढंग अपनाया जाना चाहिए जिससे प्रकृति का विनाश न हो, क्योंकि इससे अंतत: मानवता का ही विनाश होगा.

    अमेज़न के जंगलों पर बाज़ार का इतना दबाव है कि तमाम दावों और वादों के बावजूद उनका कटना नहीं रुक पाया है.

    सोयाबीन की खेती से लेकर बड़े बड़े पशुफ़ार्मों के कारण हज़ारों हेक्टेअर जंगल काटा जा रहा है.

    ***********************************************************

    BBC

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more