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बसपा की समर्थन वापसी ने संप्रग सरकार को नई मुसीबत में डाला (लीड-1)

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    नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। परमाणु करार के मुद्दे पर वामदलों की आपत्ति के चलते पहले से ही मुश्किलों में फंसी केंद्र की कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने नया झटका दिया है।

    नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। परमाणु करार के मुद्दे पर वामदलों की आपत्ति के चलते पहले से ही मुश्किलों में फंसी केंद्र की कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने नया झटका दिया है।

    मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने शनिवार को संप्रग सरकार से समर्थन वापस ले लेने का ऐलान किया।

    ज्ञात हो कि बसपा केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थी। लोकसभा में उसके 17 सदस्य हैं। हालांकि बसपा के समर्थन वापसी से केंद्र सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    बसपा ने इस आरोप के साथ संप्रग सरकार से समर्थन वापस लिया है कि वह खाद्य पदार्थो की आसमान छूती कीमतों को रोक पाने में पूरी तरह विफल रही है।

    बसपा सुप्रीमो व उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने आज दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, "महंगाई पर काबू पाने में केंद्र सरकार पूरी तरह असफल रही है। हमारे लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक समान हैं। कांग्रेस ने हमारी छवि को धूमिल करने का प्रयास भी किया है।"

    कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि बसपा वैसे तो कभी भी संप्रग की सहयोगी नहीं रही लेकिन पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए बसपा की समर्थन वापसी और भी मुश्किलें खड़ी करने वाली है।

    सूत्रों का कहना है कि मायावती की समर्थन वापसी से समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच नजदीकियां बढें़गी। क्योंकि वामपंथी दल यदि केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लेते हैं तो इस सूरत में सपा के 37 सांसदों के सहारे कांग्रेस की सरकार चलती रह सकती है।

    समर्थन वापसी के संबंध में मायावती की घोषणा के चंद घंटों पहले भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के मुद्दे पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक समझौते को मजबूत करने के मकसद से एक निकृष्ट परमाणु करार को मनगढंत ऊर्जा जरूरतों के बहाने प्रोत्साहित कर रही है।

    माकपा ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिका के दबाव में आकर कांग्रेस भारत-ईरान गैस पाइप लाइन परियोजना से अपने पैर पीछे खींच रही है।

    बहरहाल, परमाणु करार के मुद्दे पर जहां वामपंथी दल अपने अड़ियल रुख पर कायम हैं, वहीं कांग्रेस भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

    सूचना व प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने यकीन जताया है कि इस साल के खत्म होते-होते परमाणु करार अमेरिकी कांग्रेस में पहुंच जाएगा।

    एक निजी टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' में दासमुंशी ने परमाणु करार के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही।

    इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी और ए. के. एंटनी ने शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भेंट की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के मुद्दे पर वामदलों से हुई अब तक की बातचीत से प्रधानमंत्री को अवगत कराया।

    दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री से लगभग 40 मिनट बातचीत की। इससे पहले, मुखर्जी ने शुक्रवार की देर रात वाम नेताओं से भेंट कर करार के मुद्दे पर उन्हें मनाने का भरपूर प्रयास किया।

    संप्रग के घटल दलों राष्ट्रीय जनता दल (राजद), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने करार के मुद्दे पर सरकार का समर्थन किया है। हालांकि ये सभी दल वामदलों को नाराज भी नहीं करना चाहते।

    उधर वामपंथी दल भी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के घटक दलों का समर्थन जुटाने में लग गए हैं। इसी क्रम में भाकपा नेता डी. राजा ने आज सुबह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि से फोन पर बातचीत की। वे कल सुबह चेन्नई रवाना होंगे और करुणानिधि से बातचीत करेंगे।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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