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झारखंड में अब भी साहूकारों का राज

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रांची, 21 जूनः झारखंड के चतरा जिले के तीन प्रखंडों में किसी भी बैंक की शाखा कार्यरत नहीं है, जिसकी वजह से ग्रामीण अपनी बचत राशि साहूकारों के पास जमा कराते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हीं से कर्ज भी लेते है। ग्रामीणों को अपनी जमा की गई राशि पर तो कोई ब्याज नहीं मिलता लेकिन कर्ज लेने पर अनापशनाप दर से ब्याज जरूर चुकाना पड़ता है।

सरकार ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के विकास के लिए विविध योजनाओं के तहत बैंकों के माध्यम से सहायता पहुंचा रही है। इसके बावजूद चतरा जिले के 40 हजार से अधिक ग्रामीण इस सुविधा से महरूम हैं और वे साहूकारों के चंगुल में फंसे हुए हैं।

जिले के लवालोंग, गिद्दोर और पुंडा प्रखंड में फिलहाल बैंकों की एक भी शाखा नहीं है। यहां ग्रामीण मजदूरी में मिलने वाले रुपये क्षेत्र के 150 साहूकारों के पास जमा करा रहे हैं लेकिन इसका उन्हें ब्याज नहीं मिलता है।

गिद्दोर प्रखंड के निवासी कुवेर माली ने कहा, "मैंने अपनी बेटी की शादी के लिए एक साहूकार से पांच प्रतिशत प्रति महीने की ब्याज से 20 हजार रुपये का ऋण लिया था लेकिन एक वर्ष के भीतर मुझे उसे 36 हजार रुपये लौटाने पड़े।"

उल्लेखनीय है कि चतरा नक्सलवादियों का गढ़ माना जाता है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी बैंक इन क्षेत्रों में अपनी शाखा खोलने को तैयार नहीं है। जानकारी के अनुसार 'बैंक ऑफ इंडिया' की एक शाखा लवालोंग में खोली गई थी लेकिन नक्सलवादियों की धमकी के बाद शाखा को कुछ ही वर्ष बाद बंद कर दिया गया।

राज्य स्तरीय बैंक समिति (एसएलबीसी) के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार इन क्षेत्रों में बैंकों को सुरक्षा मुहैया कराने में असफल रही है। नक्सलवादियों और अपराधियों से बैंकों को धमकी मिलती है। नक्सलवादियों ने यहां कई बैंकों की शाखाओं को लूट लिया है। इसलिए इस क्षेत्र में बैंकों की सभी शाखाएं बंद हो गईं हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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