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माया ने सपा व भाजपा के बाद अब कांग्रेस के साथ खेला खेल

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    लखनऊ, 21 जून (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ कई साल पहले खेले गए राजनीतिक खेल को बसपा ने इस बार कांग्रेस के साथ खेला है। अलबत्ता यह देखना अभी बाकी है कि इसका नतीजा पहले के दो मामलों से कितना अलग होता है।

    बसपा ने पहली बार दो जून 1995 को तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की उस सरकार से समर्थन वापस लिया, जिसमें वे खुद भी शामिल थीं। स्टेट गेस्ट हाउस के नाटकीय घटनाक्रम के बाद केन्द्र की तत्कालीन पी़ वी़ नरसिंह राव सरकार ने अल्पमत में आने के कारण मुलायम सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया था, हालांकि सपा प्रमुख यह दावा करते रहे कि बहुमत का फैसला सदन के भीतर होना चाहिए।

    समर्थन वापसी का यह फैसला बसपा और खास कर स्वयं मायावती के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ और मुलायम सरकार की बर्खास्तगी के बाद मायावती भाजपा के सहयोग से पहली बार मुख्यमंत्री बनी और बसपा के इतिहास में यह ऐतिहससिक पड़ाव था।

    दूसरी बार बसपा द्वारा समर्थन वापसी का स्वाद भाजपा ने चखा, लेकिन उसका जायका बिगड़ने से बच गया। मार्च 1997 में बसपा और भाजपा ने छह-छह महीने के लिए मुख्यमंत्री पद का समझौता कर सरकार बनायी। मायावती की पारी के बाद कल्याण सिंह की पारी का एक महीना भी नहीं पूरा हुआ था कि बसपा ने 20 सितम्बर 1997 को समर्थन वापस ले लिया।

    मुलायम सरकार की तरह कल्याण सरकार भी अल्पमत में आयी लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों ने कुशल राजनीतिक प्रबंधन का परिचय देते हुए कांग्रेस और बसपा के विधायक दलों में विभाजन कराकर और कतिपय निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटा कर सरकार बचा ली।

    जहां तक ताजा समर्थन वापसी का सवाल है तो से इसकी पृष्ठभूमि पहले से ही तैयार हो रही थी। महंगाई और उत्तर प्रदेश को विशेष पैकेज न दिए जाने का मुद्दा इस पृष्ठभूमि का आधार बना। भले ही समर्थन वापसी से संप्रग सरकार को फौरी तौर पर कोई खतरा न हो लेकिन राजनीतिक हल्कों में नए सिरे से कई संभावनाएं खंगाली जा रही हैं।

    राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि अगर वाम दल परमाणु करार के मुद्दे पर अड़े और सरकार को खतरा उत्पन्न हुआ तो सपा के पास संप्रग सरकार को बचाने के सिवा कोई विकल्प नहीं होगा क्योंकि लोकसभा चुनाव के लिए सपा अभी तैयार नहीं है। इसके उलट बसपा लोकसभा चुनाव की तैयारी की दृष्टि से अन्य दलों से कहीं आगे है और लोकसभा चुनाव का समय से पहले होना उसके लिए फायदेमंद माना जा रहा है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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