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छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही घर लौटने लगे हैं परदेसी

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    सुजीत कुमार

    सुजीत कुमार

    रायपुर, 21 जून (आईएएनएस)। हर साल बरसात का मौसम छत्तीसगढ़ की मिट्टी को न सिर्फ नया जीवन देता है,बल्कि परदेसियों को अपनी जन्मभूमि की याद भी दिलाता है। दूसरे राज्यों में काम कर रहे हजारों लोग बारिश से गीली हो चुकी अपनी जमीन को आबाद करने के लिए वापस लौट रहे हैं।

    मानसून के आते ही राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ जाते हैं और दूसरे राज्योंे में काम करने वाले लोग वापस घर लौटते हैं। मानसून ही वह मौसम है जब राज्य में काम की कमी नहीं होती। शेष महीनों में राज्य के लोगों को दूसरे शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है।

    रायपुर होते हुए अपने गांव लौट रही 40 वर्षीया डेहुरी बाई ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "पिछले तीन वषों से मैं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक भट्ठे पर काम करती रही हूं। इसमें मेरा साथ मेरे पति देते हैं। हर साल बारिश के मौसम में हम घर लौटना नहीं भूलते। करीब चार महीने हम गांव में रहते हैं और फिर वापस गोरखपुर लौट जाते हैं।"

    राजनीतिक पार्टियों और संगठनों का मानना है कि हर साल एजेंटों के मार्फत करीब 5 लाख लोग दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं। अधिकांश लोग ईंट भट्ठों पर या लोगों के घरों में काम करते हैं। राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में एजेंटों की सक्रियता अधिक होती है। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रेम नारायण वर्मा ने इस संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा, "इन मजदूरों की लाचारी का सबसे अधिक फायदा एजेंट व दलाल उठा रहे हैं। कई बार मासूम लड़कियों और महिलाओं को यौन शोषण के जाल में उलझा दिया जाता है।"

    इन दिनों राज्य के रेलवे स्टेशनों और बस अड़डों पर इन परदेसियों का जमावड़ा लगा हुआ है। ये परदेसी अपने संबंधियों के लिए कपड़े और दूसरे उपहार लाना नहीं भूलते। सितंबर के महीने से वे वापस काम पर लौटने लगते हैं।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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