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इसराइल-हमास समझौता प्रभावी

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    अप्रैल 2007 से ग़ज़ा में इसराइली हमलों में 600 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं
    दोनों पक्षों ने गत मंगलवार को इस समझौते की घोषणा की थी और गुरूवार को इसके प्रभावी होने की बात कही गई थी लेकिन प्रभावी होने के समय से कुछ ही देर पहले भी दोनों तरफ़ से कुछ हमले हुए.

    इस समझौते में कहा गया है कि इसराइल ग़ज़ा पट्टी क्षेत्र में घुसकर हमले रोक देगा और ग़ज़ा क्षेत्र से दक्षिणी इसराइल में दागे जाने वाले मिसाइल भी रोक दिए जाएंगे.

    इसराइल ग़ज़ा की नाकेबंदी भी हटा देगा और क़ैदियों की अदला-बदली के लिए अगले स्तर की बातचीत की जाएगी.

    संवाददाताओं का कहना है कि इस समझौते के लागू होने के समय ही दोनों तरफ़ से हमलों का होना यह दिखाता है कि यह समझौता कितना नाज़ुक है.

    हालाँकि गुरूवार को तड़के जब यह समझौता प्रभावी हुआ तो उस समय किसी भी तरह से गोलीबारी होने की ख़बरें नहीं मिली हैं.

    इसराइल और हमास के बीच यह समझौता मिस्र ने कराया है. इसराइल सरकार ने इस युद्धविराम समझौते को बुधवार को मंज़ूरी दी थी है और यह समझौता शुरू में छह महीने के लिए लागू रहेगा.

    इसराइली प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने बुधवार को कहा था कि यह समझौता काफ़ी नाज़ुक है और हो सकता है कि यह ज़्यादा दिन तक ना टिक पाए. उन्होंने कहा कि इसराइल इस समझौते पर अमल करेगा लेकिन अगर ग़ज़ा क्षेत्र से दक्षिणी इसराइल में रॉकेट दागे जाते हैं तो इसराइली सैनिक कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं.

    एहूद ओलमर्ट ने कहा, "हमें किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए. हमास सहित अनेक आतंकवादी संगठनों ने अपने लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं किया है."

    फ़लस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि ग़ज़ा में सभी चरमपंथी संगठन इस युद्धविराम समझौते का पालन करेंगे.

    पिछला समझौता अप्रैल 2007 में टूट गया था और तब से दोनों पक्षों की लड़ाई में लगभग 600 फ़लस्तीनी और 18 इसराइली मारे जा चुके हैं.

    ग़ज़ा में हमास के नेता इस्माईल हानिया ने कहा है कि "अगर इसराइल इस समझौते का पालन करता है तो यह समझौता इसराइल के लिए स्थिरता लाएगा."

    येरूशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता टिम फ्रेंक्स का कहना है कि इस समझौते से इसराइल के दक्षिणी इलाक़ों में रहने वाले इसराइलियों को इस समझौते से कुछ राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है लेकिन कुछ लोगों को यह भी डर है कि युद्धविराम समझौते से हमास को ख़ुद को फिर से संगठित होने और मज़बूती हासिल करने का मौक़ा मिल सकता है.

    बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हमास के लिए यह समझौता एक तरह से इस बात की स्वीकृति है कि ग़ज़ा पट्टी क्षेत्र की इसराइली नाकेबंदी की वजह से वहाँ के प्रशासन और ग़ज़ा के लोगों पर उसका बहुत बुरा असर पड़ रहा था.

    ग़ज़ा पर दबाव

    हमास ने फ़तह संगठन के वफ़ादार सैनिकों को बाहर निकालकर जून 2007 में ग़ज़ा की सत्ता संभाली थी. ग़ौरतलब है फ़तह फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के समर्थन वाला संगठन है.

    ग़ज़ा में हमास की सरकार बनने के बाद से ही इसराइल, फ़लस्तीनी प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हमास को अलग-थलग करने की कोशिश की है.

    इसराइल तभी से ग़ज़ा क्षेत्र को एक "शत्रु क्षेत्र" घोषित कर चुका है और हमास पर दबाव बढ़ाने के लिए ग़ज़ा की नाकेबंदी भी की है जिससे वहाँ ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों को बड़ी परेशानी हुई है.

    इसराइल का कहना है कि उसने हमास पर यह दबाव इसलिए बनाया है ताकि ग़ज़ा क्षेत्र से इसराइल के अंदर दागे जाने वाले रॉकेटों को रोका जा सके लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि स्थायी शांति अभी बहुत दूर नज़र आती है क्योंकि दोनों ही पक्षों ने आगाह किया है कि अगर इसका ज़रा भी उल्लंघन हुआ तो यह समझौता तुरंत समाप्त हो जाएगा.

    मिस्र ने हमास और इसराइल के बीच यह समझौता कराने के लिए कई महीने तक कोशिशें की हैं. मिस्र की सरकारी समाचार एजेंसी मेना ने कहा है कि दोनों ही पक्षों ने इस समझौते का पहला चरण स्वीकार कर लिया है और "मिस्र को उम्मीद है कि दोनों पक्ष इस समझौते को सफल बनाने में कोई क़सर नहीं छोड़ेंगे."

    BBC

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