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    परमाणु समझौता : वामदलों की धमकी के बीच सरकार को सहयोगियों का समर्थन (लीड-1)

    By Staff
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    नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। परमाणु करार के मुद्दे पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) भले ही सरकार गिराने की धमकी दे रही हो लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के प्रमुख सहयोगी इस मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ खड़े हैं।

    नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। परमाणु करार के मुद्दे पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) भले ही सरकार गिराने की धमकी दे रही हो लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के प्रमुख सहयोगी इस मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ खड़े हैं।

    रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) से खुला समर्थन मिलने के बाद प्रधानमंत्री ने आज राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सुप्रीमो व कृषि मंत्री शरद पवार से सहयोग मांगा।

    प्रधानमंत्री ने पवार से कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सेफगार्ड समझौते की दिशा में सरकार आगे बढ़े, इसके लिए वे वामदलों को समझाने का प्रयास करें।

    इस बीच वामपंथी दल भी इस मुद्दे पर संप्रग के सहयोगियों को अपने पाले में करने में जुट गए हैं।

    माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीतराम येचुरी ने इस मसले पर डीएमके प्रमुख के. करूणानिधि से फोन पर बातचीत की और आज वे रेल भवन में राजद अध्यक्ष लालू यादव से भी मिले। उल्लेखनीय है कि दोनों दलों ने बुधवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि वे इस मसले पर सरकार के साथ हैं।

    उधर, इस्पात मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि संप्रग-वाम समन्वय समिति इस संबंध में जो भी फैसला लेगी हम उसका समर्थन करेंगे।

    वामदलों की धमकी के मद्देनजर कांग्रेस खेमे में मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से चर्चा की। वामदल यदि समर्थन वापस लेते हैं तो पार्टी के समक्ष क्या विकल्प होंगे, इन्हीं संभावनाओं पर कांग्रेसी रणनीतिकारों ने विचार किया।

    इससे पहले माकपा ने संकेत दिए थे कि संप्रग सरकार यदि भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते पर आगे बढ़ती है तो वह केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस ले सकती है।

    येचुरी ने संवाददाताओं को बताया, "सरकार के पास 25 जून तक का समय है। तब तक वह इस पर सोच-विचार कर ले। यदि वह आगे बढ़ती है तो हमें समर्थन के मुद्दे पर पुनर्विचार करना होगा।"

    येचुरी ने कहा कि इस मामले पर आगामी 25 या 26 जून को 15 सदस्यीय संप्रग-वाम समन्वय समिति की प्रस्तावित बैठक में भी चर्चा की जा सकती है।

    साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा, "ऐसा नहीं है कि हम यहां से वापस नहीं लौट सकते। अगली बैठक में हम आगे की संभावनाएं तलाश सकते हैं।"

    ज्ञात हो कि येचुरी ने मंगलवार की शाम संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी से भेंट की थी। माना जा रहा है कि इस भेंट के दौरान येचुरी ने सोनिया को अपनी पार्टी की भावनाओं से अवगत करा दिया था।

    वामदल लगातार धमकी देते रहे हैं कि सरकार यदि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सेफगार्ड समझौते की दिशा में आगे बढ़ती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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