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पूर्वी राज्य बाढ़ की चपेट में, राहत कार्य तेज (लीड-1)

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    नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। मानसून के सक्रिय होने के साथ ही पूरबी भारत के असम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारंखड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है।

    नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। मानसून के सक्रिय होने के साथ ही पूरबी भारत के असम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारंखड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है।

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी तैयारी में जुट गया है। बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने और आसपास के क्षेत्रों से कटे पड़े इलाके में राहत पैकेट गिराने का काम जारी है।

    उड़ीसा के उत्तरी इलाकों में बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है। बालासोर जिले में पानी के तेज बहाव के कारण पीड़ित लोगों तक खाद्य सामग्री नहीं पहुंच पा रही है।

    बाढ़ से उत्तरी उड़ीसा में लगभग दस लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पांच दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश से स्थिति और भी भायावह होती जा रही है। बालासोर जिले में सबसे अधिक आठ लाख लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य में करीब 40 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

    राज्य के राहत अधिकारी कुलमणि मिश्रा ने आईएएनएस को बताया कि बाालसोर जिले के 849 गांवों का संपर्क दो दिनों से कटा हुआ है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय राजमार्ग 60 पर कम से कम तीन जगहों पर दरार आ जाने से विभिन्न क्षेत्रों से संपर्क कट गया है। "

    बाढ़ के कारण कम से कम सात लोगों की मौत होने की रिपोर्ट है, जबकि आधिकारिक रूप से केवल दो मौतों की ही पुष्टि हुई है।

    पश्चिम बंगाल में बाढ़ के कारण अब तक नौ लोगों की मौत हो गई है। वायु सेना की नौकाओं ने करीब 80 लोगों को बचा लिया है। राज्य में बाढ़ के कारण करीब 16 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस कारण पड़ोसी राज्य उड़ीसा के साथ रेल सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है।

    राज्य में भारी बारिश के कारण पूर्वी और पश्चिमी मिदनापुर जिले सबसे अधिक प्रभावित है। यहां पर सेना और वायु सेना के दो सौ से अधिक जवान बचाव कार्यो में लगे हैं।

    दक्षिण पूर्वी रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ के कारण पश्चिम बंगाल और उड़ीस के बीच लंबी दूरी की गाड़ियां का संचालन पिछले तीन दिनों से ठप है।

    उधर, इस्पात शहर के रूप में मशहूर जमशेदपुर में बाढ़ आने के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने उड़ीसा को जिम्मेदार ठहराते हुए स्थिति से निपटने के लिए सेना तैनात कर दी है।

    कोड़ा ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, "उड़ीसा सरकार द्वारा बिना सूचना के दो बांधों के फाटक खोलने के कारण ही जमशेदपुर में बाढ़ आई है।"

    झारखंड-उड़ीसा सीमा पर स्थित रेवन और बांक बिल बांध के फाटक खोले जाने से राज्य में बाढ़ की नौबत आई है। राज्य में लगातार हो रही तेज बारिश से राजधानी रांची और जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है।

    बाढ़ से राज्य में एक लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। जमशेदपुर में सेना राहत कार्य में जुटी हुई है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए तीस नावें इस्तेमाल में लाई जा रही हैं।

    असम में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य में नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) के करीब दो सौ सदस्य बाढ़ प्रभावित लखीमपुर, धुब्री और हालाकांडी में राहत कार्यो में लगे हुए हैं।

    बिहार के 15 बाढ़ प्रभावित जिलों में 30 सदस्यीय एनडीआरएफ की टीम ग्रामीणों को बाढ़ से बचने का प्रशिक्षण दे रही है।

    इधर, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में सोहेली नदी पर बने बांध के टूट जाने के कारण् बाढ़ का पानी सात गांवों में प्रवेश कर गया है। राज्य के 32 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

    इस बीच महाराष्ट्र में भी एनडीआरएफ का 10 सदस्यीय दल बाढ़ और अन्य आपदाओं से बचने के लिए लोगों को प्रशिक्षित कर रहा है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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