मणिपुर में आतंक के साये में है मीडिया

अखबारों का गुनाह यही था कि उन्होंने उपरोक्त गुट के एक विरोधी समूह का बयान प्रकाशित किया था। इससे नाराज होकर इस गुट ने संपादकों को धमकी दी। राजधानी इंफाल से प्रकाशित सभी नौ प्रमुख अखबारों ने सोमवार और मंगलवार को प्रकाशन बंद रखा।
प्रतिष्ठित अखबार इंफाल फ्री प्रेस के संपादक प्रदीप फनजोबम ने कहा, "पत्रकारों की एक अहम बैठक के बाद आज से अखबार का प्रकाशन बहाल हो सका। यह फैसला लिया गया कि मीडिया किसी ऐसे बयान को नहीं छापेगा, जिसमें विरोधी गुट को निशाना बनाया गया हो।"
मणिपुर में पत्रकारों को धमकी देना या उन्हें निशाना बनाना नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षो में राज्य में चार पत्रकारों की हत्या हो चुकी है, इनमें तीन संपादक थे। हाल ही में एक संगठन पीपुल्स रिवोल्युशनरी पार्टी ऑफ कांगलेइपक (प्रेपक) ने मीडिया को धमकी दी थी कि अगर उसने विरोधी गुट के बयान को तवज्जो दी तो पत्रकारों को निशाना बनाया जाएगा। इस दबाव में तब कई अखबारों और चैनलों ने अपनी सेवाएं ठप्प कर दी।
राज्य में करीब 19 आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं। वे स्वायत्तता से लेकर आजादी तक की मांग के समर्थन में हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


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