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पाकिस्तान में बर्ख़ास्त जजों को वेतन

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    इफ़्तेख़ार चौधरी के समर्थन में काफ़ी वकील सामने आ गए थे
    जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के वकील अतहर ने उनके घर के बाहर मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि जस्टिस चौधरी को मुख्य न्यायाधीश की तनख़्वाह का चैक दिया गया है.

    वकील अतहर का कहना था कि जजों को दिए जाने वाले चैक पर जजों के नामों से पहले जस्टिस लगाया गया है जोकि राष्ट्रपति जनरल (रिटायर्ड) परवेज़ मुशर्रफ़ के इस बयान को बेमानी साबित करता है कि तीन नवंबर को पीएसओ के तहत शपथ ग्रहण ना करने वाले जज अब जज नहीं रहे.

    उन्होंने कहा कि इन बर्ख़ास्त जजों में शामिल जस्टिस जावेद इक़बाल को तनख़्वाह का चेक नहीं दिया गया क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान प्रेस काउंसिल के चैयरमैन का ओहदा संभाल लिया था.

    क़ानून सचिव आग़ा रफ़ीक़ ने मंगलवार को जज कॉलोनी जाकर बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार मोहम्मद चौधरी, जस्टिस सरदार रज़ा ख़ान और जस्टिस नासिरुल मुल्क को वेतन के चेक दिए जबकि सुप्रीम कोर्ट के वो बर्ख़ास्त जज, जो जज कॉलोनी में नहीं रहते हैं, या देश से बाहर हैं, उनके चेक इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के हवाले कर दिए गए.

    सुप्रीम कोर्ट के बर्ख़ास्त न्यायाधीश ख़लीलुर्रहमन रम्दे और जस्टिस मियाँ शाकिरुल्लाह जान ब्रिटेन के दौरे पर हैं जबकि बाक़ी छह जज साहेबान अपने निजी घरों में रह रहे हैं.

    कार ख़र्च नहीं

    ध्यान रहे कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन आसिफ़ अली ज़रदारी के निर्देश पर प्रधानमंत्री सैयद यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने पीसीओ के तहत शपथ ग्रहण नहीं करने वाले विभिन्न अदालतों के साठ जजों को वेतन अदा करने के आदेश जारी किए थे.

    वकीलों ने बर्ख़ास्त जजों की बहाली की माँग को लेकर मार्च किया है

    तनख़्वाह का चेक वसूल करने वाले सुप्रीम कोर्ट के बर्ख़ास्त जस्टिस सरदार रज़ा ख़ान, कहा है कि उन्हें ये चेक उस खाते से नहीं दिए गए जहाँ से जज रहते हुए उनकी तनख़्वाह आती थी.

    जस्टिस सरदार रज़ा ख़ान ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि क़ानून सचिव ने उन्हें दस्तावेज़ भी दिखाए हैं जिसके तहत उन्हें वेतनों के चेक दिए गए हैं.

    उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जज साहेबान बहाल होंगे तो ये रक़म उनकी तनख़्लवाहों की मद में समायोजित कर ली जाएगी.

    जस्टिस सरदार रज़ा ख़ान ने कहा कि वेतन के चेक में बर्ख़ास्त जजों के इस्तेमाल में आने वाली कारों के पेट्रोल का ख़र्चा शामिल नहीं है. उन्होंने कहा कि तीन नवंबर से पहले उन जज साहेबान को चार सौ लीटर प्रतिमाह पेट्रोल मिलता था जो अब बढ़ाकर छह सौ लीटर कर दिया गया है.

    उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जो बर्ख़ास्त जज साहेबान अपने पुश्तैनी घरों में रह रहे हैं, उनके घर अब भी जज कॉलोनी में उनके नाम हैं.

    ध्यान रहे कि राष्ट्रपति जनरल (रिटायर्ड) परवेज़ मुशर्रफ़ ने तीन नवंबर 2007 में देश में आपातकाल लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के साठ जजों को बर्ख़ास्त करने के बाद उन्हें घरों नज़रबंद कर दिया था.

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