वसीम बरेलवी को फिराक पुरस्कार

पुरस्कार ग्रहण करने के बाद बरेलवी ने कहा कि गालिब, मीर और नजीर के शहर ने उन्हें महान सम्मान से नवाजा है। उन्होंने कहा, "यह पुरस्कार मेरे लिए इम्तिहान है।" अहमद ने कहा कि बरेलवी की शायरी में राष्ट्र की आत्मा झलकती है। उसमें भाषा और विचारों का अनूठा संगम है।
बरेलवी रूहेलखंड विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रमुख हैं और वह कला संकाय के डीन भी रह चुके हैं। उन्होंने उर्दू शायरी पर आधा दर्जन से ज्यादा किताबे लिखी हैं और कई फिल्मों और टीवी धारवाहिकों में उनके गीत लिए गए हैं। वह कहते हैं, " मैं चल रहा हूं, चलना भी एक आदत है, यह भूलकर कि रास्ता कहां जाता है।"
बरेलवी ने कहा, "हमारे समाज को पाशचात्य संस्कृति से लगातार खतरा बना हुआ है। भविष्य की लड़ाइयां जमीन या इलाके के लिए नहीं, बल्कि सांस्कृतिक वर्चस्व के लिए लड़ी जाएंगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


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