'सिंगापुर में राम आदर्श पुरुष हैं'

इसीलिए वहां के समाज में राम रच-बस गए हैं। यह आकलन है सिंगापुर में 18 साल से रह रहे सी़ क़े पद्मनाभन का। वे इस समय भास्कर आर्ट अकादमी सिंगापुर के प्रशासनिक निदेशक हैं।
सिंगापुर में रहकर भारतीय संस्कृति और कला का प्रचार प्रसार करने में जुटे पद्मनाभन ने बताया कि सिंगापुर के अलावा मलेशिया, थाइलैंड, बाली द्वीप और इंडोनेशिया में राम की कथाओं को बड़ी चाव से देखा और सुना जाता है। जो भी इन कथाओं का मंचन देखता है वह रोमांचित हुए बिना नहीं रह पाता।
अंतर्राष्ट्रीय रामलीला मेला में सिंगापुर से अपनी प्रस्तुति देने आए पद्मनाभन ने बताया कि पूर्व काल में अयोध्या नाम का शहर सिंगापुर की राजधानी तक रहा है। यह पूरी तरह राम और सिंगापुर के संबंधों को दर्शाने वाला है।
वे बताते हैं कि जब भी सिंगापुर के किसी हिस्से में वे राम से जुड़े कथानक का मंचन करते हैं तो वहां मौजूद भारतीयों के अलावा चीन व मलेशिया के निवासी और बच्चे मंत्र मुग्ध हो जाते हैं। सिंगापुर में राम को देवता के तौर पर नहीं बल्कि एक आदर्श के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है।
भास्कर अकादमी सिंगापुर भारतीय कला और नृत्य का प्रचार प्रसार भी कर रही है। इस अकादमी द्वारा नृत्य, संगीत, योग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में लगभग तीन हजार बच्चे उनके यहां प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं। इतना ही नहीं बीते साल इस अकादमी ने सिंगापुर के दो सौ से अधिक विद्यालयों में कथकली की प्रस्तुति की थी।
पद्मनाभन के अनुसार कथकली और चीन के ओपेरा में काफी समानता है इसलिए सिंगापुर में रहने वाले चीनी को कथकली काफी पसंद आती है। इतना ही नहीं बौद्ध धर्म की कुछ कथाए हनुमानजी से मिलती जुलती है इसलिए बौद्ध धर्म को मानने वाले भी राम कथाओं की ओर आकर्षित होते हैं।
अकादमी के सी वॉग ची मैग बताते हैं बुद्ध के एक अनुयायी द्वारा लिखी पुस्तक जर्नी टू दी वैस्ट में बंदर का जिक्र है जो रामायण के हनुमान की तरह है। जब राम कथाओं का मंचन होता हैं तो वहां के बौद्ध अनुयायी उसे बुद्ध से जोड़ते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


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