मुखर्जी ने चीनी विद्वान को पद्मश्री दी

Ji Xianlin
बीजिंग, 7 जूनः भारत के कुछ प्रमुख ग्रंथों 'रामायण', 'शाकुंतलम' और 'पंचतंत्र' का चीनी भाषा में अनुवाद करने वाले 96 वर्षीय जी जियानलिन को भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार शाम पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित किया।

जी एक जाने-माने आदर्शवादी, विद्वान और इतिहासकार हैं, जिन्होंने चीनी छात्रों व विद्वानों में अपने प्रेरक कार्यो से भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव पैदा किया है। इस उत्कृष्ट कार्य से अपनी खास पहचान बना चुके जी को भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान देते हुए मुखर्जी ने कहा कि आने वाली कई पीढ़ियां जी को उनके इस उत्कृष्ट योगदान के लिए याद रखेंगी।

इस पुरस्कार समारोह में चीन के पूर्व विदेश मंत्री और एनपीसी के विदेश मामलों के अध्यक्ष ली झाओजिंग भी मौजूद थे। काफी दूरी तय करके यह सम्मान पाने पहुंचे जी ने कहा, "आज से तीन साल बाद मैं 100 साल का हो जाऊंगा, लेकिन वह मेरा अंत नहीं, बल्कि मेरी शुरुआत होगी। मैं जब तक जीवित रहूंगा, भारत और चीन के लोगों को समझने में लगा रहूंगा।"

उल्लेखनीय है कि इस समय मुखर्जी तीन दिन की चीन यात्रा पर हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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