• search

जर्मनी चुनावों में अहम हो सकता हैं विदेश नीति

Subscribe to Oneindia Hindi
Germany
बर्लिन, 5 जूनः जर्मनी की विदेश नीति के कुछ पहलुओं के बारे में चांसलर एंजेला मेर्केल और विदेश मंत्री फ्रैंक-वाल्टर स्टेनमेयर के परस्पर विरोधी विचारों का वहां 15 महीने बाद होने वाले चुनावों पर असर पड़ सकता है।

जर्मन राजनीतिक विश्लेषक हेनिंग रिके के मुताबिक, जर्मनी की बेहतरी के बारे में मोटे तौर पर तो सहमति है, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि अगले साल सितंबर में होने वाले चुनावों के दौरान सोशन डेमोक्रेट - एसडीपी के स्टेनमेयर, क्रिश्चियन डेमोकट्र-सीडीयू की चांसलर के प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आ सकते हैं।

विदेश नीति के ज्यादातर मसले तो जस के तस रहेंगे ,लेकिन चीन और रूस के साथ नीति विशेषकर मध्य यूरोप में अमेरिका की प्रक्षेपास्त्र रक्षा कवच की योजना जैसे मसले चुनावों में अहम हो सकते हैं। हेनिंग के मुताबिक सर्वसम्मत राय बनने से पहले वाद-विवाद और तनाव की स्थिति बन सकती है।

पिछले महीने रूस की यात्रा के दौरान स्टेनमेयर उस समय बेहद खफा हो गए थे जब उन्हें एसपीडी के एक सदस्य की तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा से मुलाकात के बारे में पता चला। इससे पहले पिछले वर्ष एंजेला की दलाई लामा से भेंट पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और जर्मनी को विदेश मंत्रालय कड़ी मशक्कत के बाद इस वर्ष जाकर चीन से रिश्ते सामान्य बना पाई।

इसी तरह इस बार भी दलाई लामा से भेंट का मसला आया तो स्टेनमेयर बड़ी चतुराई से उसे टाल गए। जिसका सीडीयू की ओर से कड़ा विरोध किया गया। जर्मनी में लगभग एक लाख लोगों की नौकरियां चीन को होने वाले निर्यात पर निर्भर हैं।

हालांकि हेंनिंग इसे स्टेनमेयर की चतुराई नहीं मानते उनका मामना है कि वह जर्मनी के आर्थिक हितों से ज्यादा मानवीय मसलों और लोकतंत्र को ज्यादा महत्व देते हैं। दोनों नेताओं के बीच यह मतभेद चुनाव के दौरान काफी गरमा सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more