अरब के शेख कराएंगे खेती-बाड़ी

Wheat Farming
इस्तानबुल, 2 जून: खाद्यान्नों की आसमान छूती कीमतों की वजह से खाड़ी देशों के शेख अब खेती-बाड़ी की ओर रुख कर रहे हैं।

खाद्यान्नों की बेतहाशा बढ़ती कीमतों के कारण सऊदी अरब, दुबई, कतर और क्षेत्र के अन्य देशों के लोगों की आर्थिक हालत पतली होती जा रही है। ये देश खाद्यान्नों की बढ़ती कीमतों से इसलिए भी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि इन्हें अपनी तेजी से बढ़ती आबादी की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए 80 फीसदी से ज्यादा अनाज आयात करना पड़ता है।

खाद्यान्नों की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए खाड़ी शासकों ने एक नई रणनीति बनाई है, जिसके तहत वे पाकिस्तान, थाईलैंड और सुडान जैसे गरीब देशों में बेकार पड़ी कृषि भूमि खरीद कर खेती करवाने की योजना बना रहे हैं।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक मई के मध्य में बहरीन के उद्योग और वाणिज्य मंत्री हसन फखरू ने थाईलैंड की यात्रा की थी और वहां बासमती चावल की जगह जैसमीन चावल की खेती के बारे में विचार-विमर्श किया था। जैसमीन चावल बहरीन में बहुत पसंद किया जाता है।

दुबई की निजी भागीदारी फर्म 'अबराज कैपिटल' कृषि आधारित कारोबार के लिए पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहती है। वैसे सऊदी अरब और कतर सूडान की उपजाऊ जमीन के प्रति ज्यादा आकर्षित हैं। मिस्र के पास निवेश के लिए पूंजी कम है, लेकिन पंरागत तौर पर उसके सूडान के साथ संबंध रहे हैं, इसलिए उसने पहले से उत्तरी सूडान में गेहूं उगाने के बारे में वहां की सरकार के साथ करार कर लिया है।

खाद्यान्न उत्पादक और व्यापारी दोनों भूमिकाओं की बदौलत संयुक्त अरब अमीरात को उम्मीद है कि वह बिचौलियों का मुनाफा खत्म कर खाद्यान्नों की कीमतों पर कुछ हद तक काबू पा सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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