नेत्रहीन सीखेंगे चमगादड़ों से 'देखने' की कला

Blind Girl
कोलकाता, 2 जूनः अमेरिका के दो नेत्रहीन विशेषज्ञ इन दिनों शहर के नेत्रहीन बच्चों को अपने आसपास के वातावरण में आसानी से चलने फिरने के लिए 'इकोलोकेशन' (ऐसी प्रक्रिया जिसमें आसपास की चीजों को महसूस किया जाता है।) की पद्धति सिखा रहे हैं।

यह पद्धति ठीक उसी तरह है जिस तरह चमगादड़ 'अल्ट्रासोनिक' तरंगों के सहारे अपनी उड़ान तय करते हैं। 'वर्ल्ड एक्सेस फार द ब्लाइंड' नामक संगठन से जुड़े ब्रायन बुशवे और डेनियल किश यहां 133 बच्चों को ऐसी ही अनोखी नेत्र शक्ति प्रदान करने की कोशिश कर रहे हैं।

किश ने बताया, "इकोलोकेशन एक ऐसी तकनीक है जिसके सहारे चमगादड़ दूरियां तय करते हैं। वे उड़ते समय एक आवाज निकालते हैं जो सामने की चीजों से टकरा कर वापस आती है। सभी वस्तुओं से टकरा कर यह आवाज अलग-अलग तरह से वापस आती है। इससे वह उस वस्तु विशेष के आकार, उसकी दूरी आदि का अंदाजा लगा लेते हैं।"

यह पूछे जाने पर कि क्या इकोलोकेशन इन बच्चों के लिए छड़ी से ज्यादा कामयाबा साबित होगा? किश ने कहा, "यह पद्धति स्थान और दूरी का आंकलन करने में मदद करती है।" उन्होंने बताया कि इसका प्रशिक्षण तीन चरणों में दिया जाएगा।

संस्थान ने 2001 में काम करना शुरू किया था तब से यह अमेरिका, हालैंड, ब्रिटेन, मेक्सिको और जापान सहित कई देशों में कार्यशालाएं आयोजित कर चुका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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