मायावती की निगाहें अब कांग्रेस नेताओं पर

सूत्रों ने बताया कि बसपा नेतृत्व ने मोना मिश्रा को प्रतापगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ाने की पेशकश की है और इस दिशा में बातचीत निर्णायक दौर में है। मौजूदा हालात ऐसे हैं जिनमें दोनों पक्षों को एक दूसरे की आवश्यकता आ पड़ी है।
दरअसल बसपा हर हाल में प्रतापगढ़ लोकसभा सीट जीतना चाहती है। यह प्रदेश में इकलौता ऐसा जिला था जहां बसपा का कभी खाता नहीं खुला था लेकिन गत विधानसभा चुनाव में बसपा ने तीन सीटें जीत कर इस मिथक को तोड़ दिया।
प्रतापगढ़ के मौजूदा सपा सांसद अक्षय प्रताप सिंह मायावती के धुर विरोधी बाहुबली निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के चचेरे भाई हैं और खास बात यह है कि प्रमोद तिवारी की भी रघुराज प्रताप से गहरी सियासी अदावत है।
सूत्रों ने बताया कि सपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती नजदीकियों की भी इस पूरे मामले में अहम भूमिका है। गौरतलब है कि कांग्रेस की ओर से प्रतापगढ़ में कालाकांकर की राजकुमारी रत्ना सिंह चुनाव लड़ती रही हैं और वे 1996 और 1999 में यहां से सांसद भी रह चुकी हैं। उन्हें प्रमोद तिवारी का बेहद करीबी माना जाता है।
सपा और कांग्रेस के बीच समझौता होने की दशा में 'सिटिंग गेटिंग' के आधार पर प्रतापगढ़ सीट का सपा के खाते में जाना तय है। अपने-अपने कारणों से प्रमोद, रत्ना और मायावती प्रतापगढ़ सीट पर रघुराज के वर्चस्व को तोड़ना चाहते हैं और इसके लिए मोना मिश्रा को बसपा उम्मीदवार बनाने की रणनीति अपनायी जा रही है।
जहां तक मोना मिश्रा की बात है तो वह पहले से ही राजनीति में हैं और प्रतापगढ़ में रानीगंज की ब्लाक प्रमुख हैं। उनके बसपा में जाने के बारे में पूछे जाने पर प्रमोद तिवारी ने आईएएनएस से कहा कि यह शरारतपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि उनके पास विभिन्न दलों से आकर्षक प्रस्ताव आते रहे हैं लेकिन उनके पास केवल विचारधारात्मक राजनीतिक प्रतिबद्घता है और वह इससे समझौता नहीं कर सकते।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


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