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मुशर्रफ की विदाई की उल्टी गिनती शुरू

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Musharraf
इस्लामाबाद, 29 मई: पाकिस्तान में सात जून को पेश किए जाने वाले बजट से पहले ही संसद राष्ट्रपति को हटाने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है।

डान समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के अनुसार राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और बर्खास्त न्यायाधीशों की बहाली के अनिश्चित भविष्य के बीच नवनिर्वाचित संसद का पहला सत्र 2 जून से आरंभ होगा। समाचार पत्र ने सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया है कि 7 जून को बजट पेश किए जाने की संभावना है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली और 100 सदस्यों वाली सीनेट है।

बजट सत्र में दोनों सदनों में अर्थव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, खाद्यान्नों और तेल की बढ़ती कीमतों, गेंहू और आटे की कमी, बिजली कटौती और गरीबों को राहत देने के मामले पर गर्मागर्म बहस होने की उम्मीद है।

बजट सत्र में बर्खास्त न्यायाधीशों को बहाल करने में गठबंधन सरकार की असफलता पर भी चर्चा होने की आशा है।

गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने इसी सत्र में संवैधानिक सुधारों की अपनी योजना को भी पेश करने का मन बनाया है। कानून मंत्री फारुक एच. नाइक ने पिछले हफ्ते संकेत दिया था कि बजट के पूर्व संवैधानिक प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी और पीपीपी सहअध्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने इस पर संशय बनाए रखते हुए कहा कि संवैधानिक प्रस्ताव बजट के पहले या बाद में कभी भी पेश किया जा सकता है।

पाकिस्तान के 'सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति' करार दिए जाने वाले परवेज मुशर्रफ पर अक्टूबर 1999 से ही कुर्सी छोड़ने का दबाव रहा है। यहां तक कि मुशर्रफ के कुछ पूर्व सहयोगी भी उन्हें कुर्सी छोड़ देने की सलाह दे रहे हैं।

बुधवार को एक बार फिर उन्हें एक और झटका उस समय लगा जब सर्वोच्च न्यायालय में उनके खिलाफ एक याचिका दायर की गई, जिसमें अदालत से अपील की गई कि वह मुशर्रफ को आर्मी हाउस खाली करने को कहें।

मुशर्रफ अपने विरोधियों के बीच लगातार घिरते जा रहे हैं और सत्ता के गलियारे में उनके प्रभाव व रसूख का दायरा तेजी से सिमटता जा रहा है। सभी हलकों से उन्हें हटाए जाने की मांग उठ रही है। उनके सहयोगी रह चुके पूर्व जनरल जमशेद गुलजार कियानी और जनरल माजिद भी उन्हें कुर्सी छोड़ देने की सलाह दे रहे हैं।

टेलीविजन पर होने वाली परिचर्चाओं में मुशर्रफ की नीतियों की तीखी आलोचना हो रही है। उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और राष्ट्रपति दोनों की कुर्सियों से हटने की सलाह दी जा रही है।

पिछले सप्ताह 26 पूर्व जनरलों ने एक बैठक आयोजित कर मुशर्रफ से पद छोड़ने की अपील की थी। इसी प्रकार 22 राजनीतिक दलों के गठबंधन 'ऑल पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट' की भी यही मांग है।

सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा कि मुशर्रफ को कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने का भी संकेत दिया।

माना जा रहा है कि जरदारी ने अमेरिका को स्पष्ट कर दिया है कि देश की जनता मुशर्रफ के खिलाफ है। ऐसे में अमेरिका को मुशर्रफ की जगह किसी और का चयन स्वीकार करना पड़ सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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