मान्यता-मेराज का तलाक मान्यः कोर्ट

मान्यता की ओर से दायर अर्जी पर बुधवार को सुनवाई करते हुए एडिशनल जज एसएन सरदेसाई ने अपने फैसले में कहा कि मुस्लिम विवाह कानून के अनुसार मान्यता व मेराज का तलाक जायज है।
सत्र न्यायालय ने सिटी मजिस्ट्रेट के अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश से दोनों को छूट दे दी और कहा कि इस मामले में बांद्रा मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश न्यायसंगत नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि कानूनन तलाक लेने के बाद महिला किसी अन्य पुरुष से शादी करने के लिए स्वतंत्र है। संजय व मान्यता की शादी की खबर सामने आने के बाद मेराज शेख ने बांद्रा मेट्रोपोलिटन कोर्ट में मामला दायर कर दावा किया था कि दोनों की शादी गैरकानूनी है, क्योंकि मान्यता से उसका अब तक तलाक नहीं हुआ है।
उसका यह भी कहना था कि उसे तलाक के लिए न तो काजी की ओर से कोई नोटिस मिला था और न ही उसने तलाक के लिए अपनी सहमति दी थी। मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि मुस्लिम विवाह कानून के तहत काजी को पति की सहमति के बिना शादी को समाप्त करने का अधिकार नहीं है।
इसी के साथ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने संजय व मान्यता को कोर्ट के समक्ष पेश होने के आदेश दिए थे। मेराज इन दिनों अवैध वसूली के एक मामले में जेल में बंद है।


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